मुंबई के 300 छात्रों ने 2 साल तक हर रविवार साथ मिलकर काम किया और इस गाँव में बना दिये 107 शौचालय।

मुंबई के किशिनचंद चेलारम महाविद्यालय के छात्रो ने सभी को प्रभावित करते हुये पलघर जिले के कारवाले गाँव में 107 शौचालय निर्मित किए हैं जिसमें गाँव में रह रहे हर परिवार के लिए एक शौचालय है।

स्वच्छता का वादा और औरतों का साम्मान करने पर मुफ्त सवारी करवाते है नॉएडा के ये ऑटोचालक!

देश में स्वच्छता मिशन की लहर पिछले दो सालो से काफी तेजी से फैला है। ऐसे में कई नागरिक ऐसे है जो अपने छोटे-छोटे कदमो से देश को स्वच्छ बनाने की मुहीम में जुट गए है। इनमे से एक नॉएडा के ऑटो चालक सचिन शर्मा भी है। इन्होने देश को स्वच्छ बनाने का सन्देश लोगो तक पहुंचाने का एक अनोखा तरीका ढूंड निकाला है। नए साल की शुरुआत उन्होंने अपने यात्रियों को रात 12 बजे और सुबह 4 बजे के बीच मुफ्त में उनकी मंजिल तक पहुंचा कर की। पर शर्त ये थी कि यात्रियों को उनसे ये वादा करना था कि वे देश को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान देंगे।

इंग्लैंड में अपनी ऐशो-आराम की ज़िन्दगी छोड़, भारत के गाँवों को बदल रहे है ये युवा दंपत्ति!

2014 में एक पति पत्नी का जोड़ा इंग्लैंड में अपनी ऐशो आराम की ज़िन्दगी छोड़कर भारत वापस आ गया। वापस आकर इन्होने न सिर्फ कई गाँवों को नशामुक्त कराया बल्कि अब एक गाँव के हर घर में शौचालय बनवाने की मुहीम में भी जुटे हुए है।

बिहार की इस महिला ने घर में शौचालय बनवाने के लिए गिरवी रखा अपना मंगलसूत्र !

बिहार के सासाराम में एक छोटे से गाँव बारहखन्ना की एक महिला ने शौचालय बनवाने के लिए अपना मंगलसूत्र गिरवी रख दिया। उनके इस जज्बे को देखकर जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया और उनके इस कदम से प्रभावित होकर उन्हें जिले के स्वच्छता कार्यक्रम का ब्रांड एम्बेसडर बना दिया।

अपने हाथों से ही प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण बनाने में जुटे हैं ये वृद्ध दंपत्ति ।

सूरत के गौरंग और स्मिता देसाई, वीर सावरकर बाग में जगह-जगह फैले प्लास्टिक के कचरे को उठाकर कूड़ेदान में फेंकते हैं।

दिल्ली के इस उपेक्षित रेलवे स्टेशन को कैनवास की तरह सजा रहे है ये कलाकार !

उत्तर रेलवे ने स्टेशन को स्वच्छ एवं सुसज्जित करने के अपने प्रयास को और मज़बूत करते हुए, दिल्ली स्ट्रीट आर्ट ग्रुप के कलाकारों से संपर्क कर नरेला स्टेशन को एक नया रूप दिया। दिल्ली स्ट्रीट आर्ट, फोटोग्राफर योगेश सैनी द्वारा आरम्भ की गयी, एक ऐसी संस्था है जो देश में कला को बढ़ावा दे रही है। अलग अलग जगह के कलाकारों की मदद से इसे आगे बढाया जा रहा है।

एक ऑस्ट्रेलियन, जिसने शौचालय को भारत की बच्चियों की शिक्षा के आड़े नहीं आने दिया !

एक ऑस्ट्रेलियाई मार्क बल्ला २०१३ से भारत के स्कूलों में शौचालय बनवाने के लिए पैसे इकठठे कर रहे हैं । धारावी के एक स्कूल को देखने के बाद उन्होंने एक संस्था बनाई जिसका उद्देश्य स्कूलों में २०,००० शौचालय बनाना है ताकि लड़कियों को अपनी पढाई बीच में ही न छोडनी पड़े।