मुंबई आकर भीख मांगने और गजरे बेचने को मजबूर किसानो के बच्चो को देश का पहला सिग्नल स्कूल दिखा रहा है जीने की नई राह !

मोहन उन हज़ारो किसानो के बच्चो में से एक है जो अपना गाँव, अपना खेत और अपना घर छोड़कर रोज़गार की तलाश में मुंबई आते है। पर यहाँ भी गरीबी और भुखमरी उनका साथ नहीं छोडती। ऐसे में शिक्षा के बारे में सोचना तक उन्हें दूर की बात लगती है। पर अब देश के पहले सिग्नल स्कूल के खुल जाने से मोहन जैसे कई बच्चो को अपने भविष्य को सुधारने का मौका मिल रहा है।

अब आप भी नाना पाटेकर की तरह कर सकते है किसानो की मदद

हाल ही में आपने पढ़ा होगा की किस तरह नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे ने अपनी तरफ से किसानो की सहायता के लिए योगदान किया।अपने इस नेक काम में आम जनता को जोड़ने के लिए अब इन दोनों सितारों ने 'नाम फाउंडेशन' नामक एक संस्था खोली है ।