26/11 : अपनी सूझबूझ से ताज के बीसवीं मंजिल पर फंसे 157 लोगों को बचाया था रवि धर्निधिरका ने।

डर और तनाव के बीच इन चार दिनों में मुम्बई ने बेमिसाल सूझबूझ और अदम्य साहस भी देखा। जिस जलते हुए ताज होटल की तस्वीरें लोगों के जहन में छपी हुई हैं उसी ताज में रवि धर्निधिरका मौजूद थे। रवि ने अपने विलक्षण सूझबूझ से अपने साथ-साथ 157 लोगों की जान बचाई थी। ये हैं रवि धर्निधिरका की कहानी!

उंगलियाँ गंवाने पर भी नहीं छोडा मोची का काम; साहस और स्वाभिमान की मिसाल है दिल्ली के दिनेश दास!

दिनेश पेशे से मोची है और दिल्ली के द्वारका इलाके के एक सड़क के किनारे बैठकर पिछले बीस सालो से अपना काम करते आ रहे है। चाहे होली हो या दिवाली, चाहे ईद हो या क्रिसमस, सड़क के इसी धुल भरे किनारे पर दिनेश आपको धुप, बारिश, सर्दी या गर्मी में अपना काम करते नज़र आ जायेंगे। पर जो नज़र नहीं आएँगी वो है उनकी उँगलियाँ।

बिना हाथों के इस युवक ने तैराकी में जीते तीन स्वर्ण पदक!

हौसले की उड़ान बिना परों के होती है। बेशक़ तिनके का भी सहारा न हों जूनून उफनते पानी को पार कर ही जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है हमारे आज के नायक, विश्वास की। जिनका खुद में विश्वास उन्हें लाख मुश्किलों के बीच से निकाल कर आज दुनियां के शिखर पर ले आया है।

बिहार की इस महिला ने घर में शौचालय बनवाने के लिए गिरवी रखा अपना मंगलसूत्र !

बिहार के सासाराम में एक छोटे से गाँव बारहखन्ना की एक महिला ने शौचालय बनवाने के लिए अपना मंगलसूत्र गिरवी रख दिया। उनके इस जज्बे को देखकर जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया और उनके इस कदम से प्रभावित होकर उन्हें जिले के स्वच्छता कार्यक्रम का ब्रांड एम्बेसडर बना दिया।

शोषण से स्टंट तक का सफर – मिलिए दीपिका पादुकोण की बॉडी डबल से !

गीता बॉलीवुड की सफल स्टंट वुमेन है। कई फिल्मों में बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियों के डबिंग किरदार भी निभाए हैं, जिनमे करीना कपूर, बिपाशा बासु और दीपिका पादुकोण भी शामिल हैं। गीता दो बच्चों की बहादुर माँ है। टीवी के कई जोखिम भरे रियलिटी शोज में काम कर चुकी हैं. लेकिन इस सफल गीता की कहानी इतनी आसान नहीं रही है।

नेत्रहीन होते हुए भी कई दृष्टिहीन लोगों को राह दिखा रही है टिफ्फनी !

एक वक्त ऐसा था जब वो खुद चल नहीं सकती थी, पर आज वो दुसरो को चलना सिखा रही है। आईये मिलते है टिफ्फनी से, जो नेत्रहीन होकर भी बहुत दूर की दृष्टी रखती है।

नीरजा भनोट की अनोखी  कहानी –एक विमान परिचारिका जिसने ३६० जानें बचाई।

सितम्बर १९८६ में आतंकवादियों ने कराची में एक हवाई जहाज का अफहरण कर लिया। इस विमान की मुख्य परिचारिका, नीरजा भनोट ने अपने अदम्य साहस से ३६० यात्रियों की जान बचाई और तीन बच्चो को बचाते हुए स्वयं शहीद हो गयी। इस वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाज़ा गया। आईये जाने नीरजा की कहानी!