बानू शेख सफी : एक कचरा बिनने वाली से एक कामयाब नर्स बनने का सफ़र!

एक कचरा बिनने वाली से एक कामयाब नर्स बनने का सफ़र बानू शेख सफी के लिए इतना आसान नहीं था। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रविदास नगर की रहने वाली बानू जब सिर्फ तीन साल की थी तब उनके पिता का देहांत हो गया। जिस उम्र में बच्चे अपने जीवन का पहला पाठ पढ़ते है, उस उम्र में बानू को जिंदगी को कई सबक एक साथ सिखा दिए। नन्ही सी बानू को अपने परिवार का पेट पालने के लिए अपनी माँ और डेढ़ साल की छोटी बहन, शमा के साथ कचरा बीनने का काम शुरू करना पड़ा।

मल उठाने वालो को सम्मान से जीना सिखाने वाले बेज़वाड़ा विल्सन को मिला रेमन मैगसेसे पुरस्कार !

बेज़वाड़ा विल्सन को इस साल, एशिया का नोबेल कहे जाने वाले प्रतिष्टित 'रेमन मैगसेसे पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें मानव मल साफ करने वाले श्रमिकों के उद्धाऱ के प्रति अपूर्व योगदान के लिए दिया गया। बेजवाड़ा कहते हैं कि वे तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक मल उठाने वाला आखिरी व्यक्ति भी अपना काम न छोड़ दे।

भारत की सबसे छोटी ट्रांसजेंडर ने स्कूल की स्टेज पर सबको बताई अपनी लैंगिक पहचान !

17 साल की नैना दिल्ली के बसंत वैली स्कूल की छात्रा है। 2015 में अपने स्कूल में उसने स्टेज पर जाकर सभी के सामने अपने ट्रांसजेंडर होने की घोषणा कर दी। नैना की ये बेबाकी और आत्मविश्वास दूसरों के लिए प्रेरणा है। नैना भारत में सार्वजनिक रूप से अपनी लैंगिक पहचान बताने वाली सबसे छोटी ट्रांसजेंडर हैं। उनके साथ उनकी माँ और उनके दोस्तों का पूरा सहयोग है।