मिलिए एक शिक्षक से जो अपनी सिमित आय में भी देखभाल कर रहे है कई बुजुर्गों और अनाथों की!

एक छोटी से छोटी कोशिश भी दुनियां को बेहतर बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण पहल है। और हम सब मिलकर छोटी-छोटी कोशिश कर सकते हैं। आज की कहानी है ऐसी ही एक छोटी सी कोशिश की।

BITS पिलानी के इस छात्र ने अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा वृद्धाश्रम को दान कर, की एक खूबसूरत बदलाव की पहल!

आज की पीढ़ी इन परंपराओं को बनाये रखने के साथ साथ इनमे कुछ ऐसे बदलाव भी कर रही है जिससे समाज का भला हो। BITS, पिलानी में पढ़ रहे नमन मुनॉट ने भी ऐसे ही एक बदलाव की पहल की है। उन्होंने अपनी पहली तनख्वाह का 20 फीसदी हिस्सा वृद्धाश्रम को दान में दे दिया।

अपनों की बेरुख़ी के शिकार बुजर्गों का सहारा बनी, 100 साल की अरुणा मुख़र्जी!

असम की 100 वर्षीय अरुणा मुख़र्जी ने गुवाहाटी नागरिक प्रशाशन से एक वृद्धाश्रम खोलने की अनुमति माँगी है। इस वृद्धाश्रम का संचालन वो खुद ही करेंगी।