4 सर्जरी और 500 स्टिचस के बाद भी, ये प्रेरक नेवी ऑफिसर हैं वापसी को तैयार।

मौत का सामना करा देने वाली दुर्घटनाओं से गुजरना हमेशा ही एक बुरे सपने की तरह होता है। बिनय कुमार, एक पूर्व नेवी ऑफिसर ने भी ऐसी ही एक दुर्घटना का सामना किया लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने इसी शानदार जज्बे के चलते अब वो वापसी को तैयार है।

गरीबी से लेकर अपंगता भी नहीं रोक पाई मरियप्पन को स्वर्ण पदक जीतने से!

हम असफलता के बहाने खोजते हैं, कभी अपनी रूकावट का दोष परिस्थितियों को, तो कभी हादसों के सिर मढ़ते रहते हैं। परिस्थितियों और हादसों से लड़कर मंजिलें पाने वालों को देखकर हमें एहसास होता है कि इनके मुकाबले हमारी परिस्थितियां तो कुछ भी नहीं थीं। ऐसी ही कहानी है हमारे नायक मरियप्पन की जिन्होंने पैरालंपिक में भारत को एतिहासिक पदक दिलाया।

हाथ नहीं है इसलिए पैरों से डालते हैं वोट, केरला के आब्दु समद !

हम सब बदलाव की बात तो बहुत करते हैं, लेकिन जब बदलाव के लिए कदम उठाने का असल वक्त आता है तो घर बैठकर छुट्टी मना रहे होते हैं। हर दिन खीज और झल्लाते परिस्थितयों को बदलने के लिए हम एक बटन दबाने के लिए घरों से नहीं निकलते हैं।

दोनों हाथो और पैरो को गंवाकर भी नहीं गंवाया हौसला – दौड़ी 10 किमी मैराथन !

शालिनी सरस्वती के दोनों हाथ-पैर नहीं हैं लेकिन वे मैराथन में दौडी हैं। शालिनी ने रविवार को 'TCS World 10K' में दस किलोमीटर की रेस दौड़ी है।

दोनों हाथ खोने के बाद भी, जम्मू-कश्मीर स्टेट क्रिकेट टीम के लिए खेलते है आमिर!

आमिर हुसैन लोन उस वक्त महज़ आठ साल के थे जब एक दुर्घटना में उन्हें अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। आज, २६ वर्ष की आयु में, वह जम्मू कश्मीर की राज्य पैरा क्रिकेट टीम (state para-cricket team) के कप्तान है।

एक मसीहा जिसने केरल के मछुआरों को शराब से मुक्ति दिलाकर नया जीवनदान दिया !

एफ. एम्. लेजर ने देखा कि केरल के मछुआरों में गरीबी का मुख्य कारण शराब है। फिर क्या था, उन्होंने इसको बदलने की ठान ली। इसके साथ-साथ उन्होंने महिलाओं और वृद्धों को साक्षर बनने में भी मदद की। इतना ही नही उन्होंने विकलांगो के लिए एक तिपहिया भी बनाया है। दृढ निश्चय वाले इस इंसान की मेहनत अब रंग ला रही है और इसका असर पूरे राज्य में दिख रहा है।

विकलांग नहीं दिव्यांग है नीतू !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल 'मन की बात' में देशवासियों से अपाहिज की जगह 'दिव्यांग' शब्द का उपयोग करने का आग्रह किया है। क्यूंकि इनमे दिव्य शक्तियां होती है। आज हम आपको एक ऐसी ही दिव्यांग से रुबरू कराने जा रहे है, जिसने बुरे वक्त में भी अदम्य इच्छाशक्ति और साहस के बूते पे ये साबित किया है कि वो सचमुच दिव्यांग है।

‘हेल्पिंग हैंड’ के ज़रिये ज़रूरतमंदों को मिल रहे है व्हीलचेयर जैसे कई उपकरण सिर्फ १ रूपये में !

विकलांगो की मदत के लिए साधन ज़्यादातर बहुत महंगे होते है। एक व्हीलचेयर की कीमत हज़ारो में होती है, वही बैसाखियाँ खरीदने के लिए भी कुछ सौ रूपये आपको खर्च करने ही पड़ते है। कई बार तो इस्तेमाल करने वाले को बहोत कम समय के लिए इनकी ज़रूरत होती है। वड़ोदरा की फाल्गुनी दोषी ने इन साधनो को कम दाम में ज़रूरतमंदों तक पहुचाने का बीड़ा उठाया।