किसान के बेटे ने किया बिना ड्राइवर के ट्रैक्टर चलाने वाले रिमोट का अविष्कार

राजस्थान के बारन जिले के बमोरी कला गाँव में एक किसान के बेटे ने खेती के लिए गज़ब का अविष्कार किया है। योगेश नागर ने ट्रैक्टर को चलाने वाले रिमोट का अविष्कार किया है जिससे दूर बैठकर ट्रैक्टर को चलाया जा सकता है। इस अनौखे अविष्कार के साथ-साथ उन्होंने अबतक 30 अविष्कार किए हैं।

सतत विकास की और बढ़ते कदम: 15 ऐसे गाँव जिन्हें देखकर आपका मन करेगा अपना शहर छोड़ यहाँ बस जाने को!

कुछ गाँव ऐसे है जो सुविधाओं में किसी शहर से कम नहीं है पर उनके मूल में वही भारतीय ग्रामीण संस्कृति बसती है। यह कुछ ऐसे गाँव है जो ना सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में पूरी तरह से आत्मनिर्भर है, साथ ही मानव जाति व प्रकृति के बीच किस तरह अद्भुत सामंजस्य बनाया जा सकता है, इसकी मिसाल पेश करते हैं।

पुरे गाँव की मदद से एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने आइआइटी में पढाई की और आज है गूगल में इंजिनियर!

जब एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे को भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश का अवसर मिला तो कैसे पूरे कस्बे ने आगे आकार उनकी मदद की; और आज वह गूगल के सिएटल  स्थित कार्यालय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।

जानिये कैसे सरकारी नौकरी छोड़, ये इंजिनियर, खेती करके बना करोड़पति !

ज़िन्दगी में अगर कुछ बड़ा हासिल करना हो तो छोटे-छोटे जोख़िम उठाने ही पड़ते है । कुछ ऐसा ही किया एक 24 वर्षीय इंजीनियर हरीश धनदेव ने। इन्होंने 2013 में अपनी अच्छी तनख़्वाह वाली सरकारी नौकरी छोड़ दी और एलोवेरा ( घृतकुमारी ) की खेती करने लगे। आज वह एक कंपनी के मालिक हैं जिसका कारोबार करोड़ो में है।

पिता के साथ जेल में रहकर की IIT की तैयारी और 453 रैंक हासिल किया!

जेल में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करना और IIT JEE में 453 रैंक पाना – 18 साल के पीयूष के लिए सफर मुश्किल था, पर उसकी मेहनत और लगन के कारण नामुमकिन नहीं था।

बाल विवाह के खिलाफ, एकजुट होकर लड़ रहे है राजस्थान के 47,000 टेंट डीलर !

बाल विवाह प्रथा के विरुद्ध एक कड़ा रुख अपनाते हुए, राजस्थान के 47,000 टेंट डीलरों ने यह फैसला लिया है कि वे किसी भी बाल विवाह के आयोजन का हिस्सा नहीं बनेंगे और ऐसे आयोजनों में किसी भी तरह के सामान की सप्लाई नहीं करेंगे।

४६ बार दसवी में फेल होने के बावजूद ७७ साल के शिवचरण ने नहीं मानी हार !

जहाँ आज के युवा पहली ही बार में मार्क्स कम आने पर निराश हो जाते हैं और आत्महत्या तक करने की सोच लेते है, वही एक मिसाल ऐसी भी है जिनसे इन निराश बच्चो को प्रेरणा मिल सकती है।

एक बलात्कार पीड़ित जिसे अपनी ही माँ ने ठुकरा दिया, आज इस अद्भुत विद्यालय मे अपने सपने पूरे कर रही है

सीता का पहले अपहरण किया गया, फिर बलात्कार किया गया और फिर उसे रेल की पटरी पर मरने के लिए छोड़ दिया गया. पर इसके बाद अपनी ही माँ द्वारा ठुकराई हुई सीता ने इस विद्यालय मे एक नया जीवन पाया जहाँ उसी की तरह दुर्भाग्यपूर्ण लड़कियो को सपने देखने का और अपने जीवन की नयी शुरूवात करने का मौका दिया जाता है