ईद मुबारक! इस ईद पर पढ़िए प्रेमचंद की कहानी – ‘ईदगाह’ !

पढ़िए मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह'. और लौट चलिए बचपने की ईद में, जहाँ ईदगाह पर ईद के जश्न का मेला लगा है और हामिद नया कुर्ता पहनकर मेला देखने आया है. हामिद के साथ-साथ आप मेले से उसकी दादी के आंसुओं तक का सफ़र करेंगे. ईद पर लिखी गयी बड़ी प्यारी सी हिंदी की ये कालजयी रचना है।

मुंशी प्रेमचंद के ऐतेहासिक घर को बचाया इस प्रोफेसर तथा उनके छात्रों ने !

सन २००५-२००६ में मुझे यूनिवर्सिटी के कुछ विद्यार्थीयो को पढ़ाने का मौका मिला। एक विषय का असर इस तरह से हुआ कि सभी विद्यार्थीयो की सोच बदल गयी और साहित्य जगत में बड़ा बदलाव हुआ।