भीख मांगकर पाला बेसहारो को! हज़ारो की माई – सिंधुताई सपकाळ !

आज़ादी के महज़ १५ महीनो बाद, देश, चाचा नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मना रहा था। इसी दिन यानी १४ नवंबर १९४८ को, पिंपरी मेघे, वर्धा गाँव के एक गरीब भैंस चराने वाले अभिमान साठे के घर एक बच्ची का जन्म हुआ। किसी को नहीं पता था कि बाल दिवस के दिन पैदा हुई ये लड़की एक दिन हज़ारो बच्चों की माई बन जायेगी।