अपनी घरेलू सहायक के साथ मिलकर सैकड़ों गरीब बच्चों को पढ़ा रही है नोयडा की मीना निझवान!

हममें से शायद ही कोई होगा जो समाज को कुछ देने की ख्वाहिश न रखता हो। हम सब सामाजिक मदद करना चाहते हैं, लेकिन अक्सर अकेले होने की वजह से या कहाँ से शुरू करें इन सवालों से जूझते रहते हैं। और अपने रोजमर्रा की ज़िन्दगी में खो जाते हैं। ये कहानी आपके इन सवालों को रास्ता दिखाएगी।

विदेश में पढ़ रही दो भारतीय छात्राएं, मोबाइल फ़ोन के ज़रिये मुफ्त में सीखा रही है अंग्रेजी !

शिक्षा में एक छोटा सा बदलाव पीढियां बदल देता है। पर भारत में ज्यादातर अशिक्षित लोग आर्थिक कारणों से स्कूल छोड़ देते हैं और जाहिर है कि स्कूल छूटने के बाद पढ़ाई भी छूट जाती है। वही वक्त की मांग कुछ ऐसी है कि शहरों में रिक्शा चालक से लेकर छोटे-छोटे काम करने वालों तक अंग्रेजी बोलना और समझना सबके लिए जरुरी हो गया है। लेकिन इन्हें सिखाने का जिम्मा कौन उठाये? सिर्फ अंग्रेजी सीखने के लिए स्कूल वापस जाना इनके लिए संभव नहीं है और न ही कोचिंग क्लासेस की महँगी फीस देना। ऐसे में दो अंडरग्रेजुएट लडकियों की एक पहल, इनकी ज़िंदगी में रौशनी भर रहा है।