भारतीय सेना से जुडी कुछ बातें, जिन्हें पढ़कर आप गौरवांवित महसूस करेंगे।

15 जनवरी 1949 के दिन जनरल सर फ्रांसिस बुचर की जगह लेकर लेफ्टिनेंट जनरल के. एम्. कर्रिअप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ बन गए। इसी ऐतहासिक दिन की याद में हर साल 15 जनवरी को आर्मी डे के तौर पर मनाया जाता है।

फोगाट बहनों के बाद हरियाणा की इन तीन बहनों ने सेना में भर्ती होकर खड़ी की एक नयी मिसाल!

जिस तरह महावीर सिंह फोगाट ने धकियानुसी परंपराओं को ताक पर रखकर अपनी बेटियों तथा भतीजियों को पहली बार अखाड़े में भेजा था उसी तरह झज्जर के खेड़का गुर्जर गांव के किसान प्रताप सिंह देशवाल ने भी अपनी बेटी प्रीती और दीप्ती तथा अपनी भतीजी ममता को सेना में भेजा है।

कश्मीर में सेना ने शुरू किया ‘स्कूल चलो’ अभियान !

भारतीय थल सेना ने एक दिल को छुने वाली मुहीम की शुरुआत की है। इस मुहीम के तहत सेना के जवान कश्मीर के बच्चो को पढाई तथा खेल कूद के लिए प्रेरित करते है। 'स्कूल चलो' नामक इस मुहीम में बच्चो को मुफ्त शिक्षा दी जाती है।

आंध्र प्रदेश के इस छोटे से गाँव के हर घर में है एक सैनिक!

माधवरम की भव्य राइफलों और हेलमेट युद्ध स्मारक के पीछे एक बेहद दिलचस्प दास्ताँ है। अमरावती से 150 किलोमीटर दूर पश्चिमी आंध्र प्रदेश के गोदावरी ज़िले की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव है माधवरम। इस गाँव का अपने निवासियों को सैन्य सेवा में भेजने का एक अलग ही शानदार इतिहास है।

मिलिए देश के हजारों युवाओं को फौजियों में तब्दील करने वाले कर्नल अजय कोठियाल से !

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) के प्रिसिंपल और कई गैलेंट्री अवार्ड्स के विजेता, कर्नल अजय कोठियाल पर्वतारोहन के अलावा भी देशहित में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। और ये भूमिका है देश की सीमा पर तैनात सेना और देश के भीतर हमारी रक्षा करने वाले पुलिस सेवा के लिए फौजियों को तैयार करने की।

सेना को बीस साल से निशुल्क कमांडो ट्रेनिंग दे रहीं देश की पहली महिला कमांडो ट्रेनर!

आज की कहानी सीमा राव के जज्बे की कहानी है। जिनमें देश के लिए बेइंतहा समर्पण है और अपने काम के लिए अपार जूनून!