मिलिए पत्रकार से किसान बने गिरीन्द्रनाथ झा से, जो अब अपने गाँव को नयी पहचान दे रहे है!

एक पत्रकार, एक लेखक, इन्टरनेट की दुनियां का एक जाना माना नाम आखिर क्यूँ एक किसान बन गया? ये कहानी है चनका, बिहार के लेखक किसान, गिरीन्द्रनाथ झा की।

भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

अगर आप कठिन से कठिन पहेलियाँ बुझाने में माहिर है और ऐतिहासिक किस्सों में दिलचस्पी रखते है तो भारतीय इतिहास के इन अनसुलझे रहस्यों को जानकर आश्चर्यचकित हो जायेंगे।

बिहार की इस महिला ने घर में शौचालय बनवाने के लिए गिरवी रखा अपना मंगलसूत्र !

बिहार के सासाराम में एक छोटे से गाँव बारहखन्ना की एक महिला ने शौचालय बनवाने के लिए अपना मंगलसूत्र गिरवी रख दिया। उनके इस जज्बे को देखकर जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया और उनके इस कदम से प्रभावित होकर उन्हें जिले के स्वच्छता कार्यक्रम का ब्रांड एम्बेसडर बना दिया।

#IamBrandBihar – बिहार और बिहारियों के बारे में हमारी सोच को बदलने की एक मुहिम !

फिल्म “ उड़ता पंजाब” में बिहार की जो छवि दिखाई गयी है, वो छवि पुरे बिहार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है। भारत के हर हिस्से में विविधता है और आप किसी एक व्यक्ति को उस हिस्से की छवि नहीं मान सकते। इसी बात को कहने के लिए और बिहार की छवि को एक नयी परिभाषा देने के लिए बंगलुरु के रहने वाले २५ वर्षीय छात्र, बशर हबीबुल्लाह ने एक ऑनलाइन मुहिम छेडी है।

भारत और जापान के कलाकार मिल कर सजा रहे है बिहार के इस गाँव के स्कूल की दीवारों को !

बिहार राज्य में स्थित सुजाता गाँव में हर साल निरंजना पब्लिक वेलफेयर स्कूल ‘वाल आर्ट फेस्टिवल’ का आयोजन करते है। भारत और जापान दोनों देशो के असंख्य कलाकार इस उत्सव में शामिल होने के लिये ३ हफ्ते इसी गाँव में आकर रहते है।

साठ बर्षो से जल, जंगल और जमीन बचाने की मुहीम चला रहा है झारखंड का ये वाटरमैन !

बीते 60 वर्ष से सिमोन की जिंदगी में कुछ भी नहीं बदला लेकिन हजारों गांव वालों की जिंदगी में बदलाव लाने का श्रेय इस शख्स को जाता है। 84 साल की उम्र में भी सिमोन ऊरांव सुबह साढ़े चार बजे उठकर खेत और जंगल की ओर निकल पड़ते है, कई तरह की मुसीबतों का सामना कर सिमोन ने अपने गांव के पास सालों पहले पौधारोपण किया था , जो आज जंगल का रूप ले चुके है और रोजाना सुबह उठकर वो इन पेड़ों और पौधो की एक झलक लेने निकल जाते है।

डिजिटल गांव के सपने को साकार करती, झारखंड की टैबलेट दीदी!

गोद में बच्चा और हाथो में टैबलेट ये नजारा झारखंड के गांवों में आम है, झारखंड के सुदूर गांवों की ये महिलाएं अपने घर- परिवार बच्चों का ध्यान रखने के साथ-साथ अपने घर को चलाने के लिए खूब मेहनत करती है। हाथ में टैबलेट लिये ये महिलाएं है झारखंड की 'टैबलेट दीदी'।

कभी नक्सली रह चुकी यह महिला, आज संवार रही है अपनी ज़िन्दगी !

जिस उम्र में बच्चे खेलते कूदते और पढ़ते है उस उम्र में शुगनी (बदला हुआ नाम) को नक्सली उसके घर से उठाकर ले गए। 9 साल की उम्र से करीब 7 साल तक शुगनी ने अपनी जिंदगी नक्सलियों के साथ काटी। लेकिन परिवारवालों की सहायता और अपनी हिम्मत के बलबूते पर आज शुगनी एक सामान्य जीवन जी रही है।