सैकड़ों साल पुरानी कुप्रथा तोड़, किन्नरों का पिंडदान करेंगे बनारस के 151 पंडित!

किन्नरों के हित में काम करने वाली संस्था 'किन्नर अखाडा' एक ऐतिहासिक आयोजन करने जा रही है, जिसमें हाल के वर्षों में स्वर्ग सिधारे किन्नरों का पिंडदान संस्कार किया जायेगा।

‘आजादी’ के असल मायने साकार करती झारखंड की ग्रामीण महिलाएं!

गांव की इन महिलाओं ने आजादी को अपना ब्रांड बनाया है। आईए हम और आप इन महिलाओं से जुड़कर इनके गरीबी मुक्त झारखण्ड के सपने को धरातल पर उतारने में मदद करें और इस स्वतंत्रता दिवस par इनके ब्रांड - 'आजादी' को प्रोत्साहित करें।

बुज़ुर्गों को अकेलेपन से दूर करने के लिए नाटूभाई चला रहे हैं मैरेज ब्यूरो!

नाटूभाई का मानना है प्यार किसी भी उम्र में हो सकता है। इसलिए समाज की परवाह न करते हुए वृद्ध लोगों को शादी कर लेनी चाहिए। नाटूभाई 50 वर्ष से ज्यादा की उम्र के लोगों को जीवनसाथी ढूँढने में मदद कर रहे हैं।

लोगों की छतें रंगकर औऱ जमीन में संगमरमर तराशकर अपना घर संवार रही हैं राधा और सविता!

किसी निर्माणाधीन इमारत के बनने की कल्पना कीजिए। आपकी कल्पना में ठेकेदार से लेकर मजदूर, बढ़ई, पेन्टर, सब पुरूष ही होंगे। हकीकत भी इस कल्पना के करीब ही है। ऐसी जगहों पर महिलाएं काम करती भी हैं तो वो मजदूरी का ही काम करती हैं। इसके लिए उन्हें पैसे भी नाम मात्र के ही मिलते हैं। जबकि, अगर इन्हें मौका मिले तो अपने कौशल से न सिर्फ अपनेआप को पुरूषों से बेहतर सिद्ध कर सकती हैं, बल्कि सारे काम बिना किसी पुरूष सहयोगी के निबटा सकती हैं।

रेप पीड़िता को बहु बनाकर कानूनी लड़ाई में साथ दे रहा है हरियाणा का ये किसान परिवार!

29 साल के जितेन्द्र छत्तर जिंद प्रांत के किसान हैं। समाज की धारणा को ठुकराते हुए उन्होंने एक रेप पीड़िता से शादी करने का निर्णय लिया। अब वो अपनी पत्नी की न्याय पाने की लड़ाई में भी उनका बखूबी साथ निभा रहे हैं। जितेन्द्र ने अपनी पत्नी का दाखिला एक लॉ स्कूल में करा दिया है जिससे वो अपनी लड़ाई खुद लड़ सकें।

मल उठाने वालो को सम्मान से जीना सिखाने वाले बेज़वाड़ा विल्सन को मिला रेमन मैगसेसे पुरस्कार !

बेज़वाड़ा विल्सन को इस साल, एशिया का नोबेल कहे जाने वाले प्रतिष्टित 'रेमन मैगसेसे पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें मानव मल साफ करने वाले श्रमिकों के उद्धाऱ के प्रति अपूर्व योगदान के लिए दिया गया। बेजवाड़ा कहते हैं कि वे तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक मल उठाने वाला आखिरी व्यक्ति भी अपना काम न छोड़ दे।

भारत की सबसे छोटी ट्रांसजेंडर ने स्कूल की स्टेज पर सबको बताई अपनी लैंगिक पहचान !

17 साल की नैना दिल्ली के बसंत वैली स्कूल की छात्रा है। 2015 में अपने स्कूल में उसने स्टेज पर जाकर सभी के सामने अपने ट्रांसजेंडर होने की घोषणा कर दी। नैना की ये बेबाकी और आत्मविश्वास दूसरों के लिए प्रेरणा है। नैना भारत में सार्वजनिक रूप से अपनी लैंगिक पहचान बताने वाली सबसे छोटी ट्रांसजेंडर हैं। उनके साथ उनकी माँ और उनके दोस्तों का पूरा सहयोग है।

एक युवा का फेसबुक पेज कैसे हजारो बच्चो के चेहरे पर मुस्कान बिखरे रहा है!

सड़क पर जन्म लेने वाले और अपनी सारी जिन्दगी इन्ही सडको के किनारे बिता देने वाले अनाथ और बेसहारा बच्चो को कई बार अपने माता पता तक का पता नहीं होता तो अपने जन्मदिन दिन का पता होना तो बहुत दूर की बात है। पर एक शख्स ने, जन्मदिन का पता न होने पर भी इन बच्चो का जन्मदिन मनाने का एक बेहतरीन तरीका ढूंड निकाला है।

दृष्टिहीनों की ज़िंदगी में रौशनी के लिए किसान ने अपने गाँव में खोला ब्लाइंड स्कूल!

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के एक छोटे से गाँव में एक किसान ने 30 दृष्टिहीन बच्चों की जिंदगीयों में रौशनी भर दी है। दृष्टिबाधित बच्चों का आवासीय स्कूल बनाकर वे उनको शिक्षा दे रहे हैं।

जानिये कैसे आम सेवा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस की क्रांति ला रहे हैं !

समूचे देश में ऐसे ग्रामीणों की संख्या बढती जा रही है जो आम सेवा केन्द्रों पर जाकर सरकारी दफ्तरों की लम्बी लाइन से बच रहे हैं। ये आम सेवा केंद्र ई-गवर्नेंस के केन्द्रों की तरह काम करते हैं।

बाल विवाह के खिलाफ, एकजुट होकर लड़ रहे है राजस्थान के 47,000 टेंट डीलर !

बाल विवाह प्रथा के विरुद्ध एक कड़ा रुख अपनाते हुए, राजस्थान के 47,000 टेंट डीलरों ने यह फैसला लिया है कि वे किसी भी बाल विवाह के आयोजन का हिस्सा नहीं बनेंगे और ऐसे आयोजनों में किसी भी तरह के सामान की सप्लाई नहीं करेंगे।

एक विडिओ, एक कहानी, एक बदलाव और बेहतर भारत की ओर एक और कदम!

द बेटर इंडिया में हमारी कोशिश है कि हम सकारात्मक खबरों के ज़रिये आप तक उन कहानियों को पहुंचाए जो समाज में एक बदलाव ला सके! हमें ख़ुशी है कि हमारी लगातार कोशिश और आपके अपार प्यार और सहयोग के ज़रिये हम अपने मक्सद में कुछ हद तक कामयाब भी हुए है। आईये जानते है, बदलाव की एक ऐसी ही कहानी!

‘बेटी बचाओ’ अभियान ने लगाया कुल्लू के दशहरे पर चार चाँद !

भारत में दो अवसरों पर लोगो की भीड़ एकत्रित होना अनिवार्य है - एक किसी भी उत्सव पर और दूसरा मतदान के मौके पर। इन दोनों ही मौको को 'बेटी बचाओ' अभियान से जोड़कर देश ने एक नया आदर्श स्थापित किया है। आईये देखे कैसे बना यह कीर्तिमान!