इस हवलदार ने नशे में धुत ड्राईवर को रोकने के बाद खुद एम्बुलेंस चलाकर बच्चे को अस्पताल पहुँचाया!

बंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के हवलदार रवि एस एन ने नशे में धुत ड्राईवर को रोकने के बाद खुद एम्बुलेंस चलाकर बच्चे को अस्पताल पहुँचाया!

बंगलुरु में कैनरा बैंक ने एटीएम बस शुरू कर, दी लोगो को लंबी कतारों से राहत!

देश भर में पैसों को लेकर किल्लत मच रही है। भारत सरकार ने 500 और 1000 के मौजूदा नोट बंद कर नए नोट जारी किये हैं, जिससे लोगों को लेन-देन में बड़ी परेशानी उठानी पड रही है। लोग रात-रातभर बैंकों और एटीएम के के सामने लाइन लगाए खड़े हो रहे हैं। ऐसे में कैनरा बैंक द्वारा शुरू किये गए मोबाइल एटीएम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।

शिक्षा से महरूम ज़िंदगियों में ज्ञान का दीप जलाते बंगलुरु के शेरवुड सोसाइटी के लोग!

बंगलुरु के टाटा शेरवुड रेज़िडेंशिअल सोसाइटी में घरेलू काम करने वालों के बच्चे हर रविवार दोपहर में ट्यूशन करने आते है, जो सोसाइटी में रहने वाले लोगों द्वारा संचालित की जाती है। इस सोसाइटी में रहने वाले लोग, एक स्वैछिक समूह 'SEE' के सदस्य हैं जो कि अपार्टमेंट में काम करने वाले कामगारों के बच्चों की स्कूल की सालाना फ़ीस के लिए चन्दा इक्कठा कर मदद करता है।

बंगलुरु में शुरू हुआ एशिया का पहला फूड ट्रक, जिसमें सभी सदस्य हैं महिलाएँ।

'सेवेन्थ सिन' फूड ट्रक की खासियत ये है, कि यह एशिया का पहला ऐसा फ़ूड ट्रक है,जिसकी सभी सदस्य महिलाएँ हैं।

बिना हाथों के इस युवक ने तैराकी में जीते तीन स्वर्ण पदक!

हौसले की उड़ान बिना परों के होती है। बेशक़ तिनके का भी सहारा न हों जूनून उफनते पानी को पार कर ही जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है हमारे आज के नायक, विश्वास की। जिनका खुद में विश्वास उन्हें लाख मुश्किलों के बीच से निकाल कर आज दुनियां के शिखर पर ले आया है।

#IamBrandBihar – बिहार और बिहारियों के बारे में हमारी सोच को बदलने की एक मुहिम !

फिल्म “ उड़ता पंजाब” में बिहार की जो छवि दिखाई गयी है, वो छवि पुरे बिहार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है। भारत के हर हिस्से में विविधता है और आप किसी एक व्यक्ति को उस हिस्से की छवि नहीं मान सकते। इसी बात को कहने के लिए और बिहार की छवि को एक नयी परिभाषा देने के लिए बंगलुरु के रहने वाले २५ वर्षीय छात्र, बशर हबीबुल्लाह ने एक ऑनलाइन मुहिम छेडी है।

दोनों हाथो और पैरो को गंवाकर भी नहीं गंवाया हौसला – दौड़ी 10 किमी मैराथन !

शालिनी सरस्वती के दोनों हाथ-पैर नहीं हैं लेकिन वे मैराथन में दौडी हैं। शालिनी ने रविवार को 'TCS World 10K' में दस किलोमीटर की रेस दौड़ी है।

शिक्षक के बगैर विद्यालय; क्यूंकि यहाँ खुद सीखते है बच्चे !

ज़रा सोचिये एक ऐसे नवयुवक के बारे में, जिसने शहर की आराम भरी ज़िन्दगी छोड़, गाँव की और रुख करने का सोचा। क्या किया होगा उसने वहां? मिलते हैं अभिजित सिन्हा से, जिसने एक स्कूल की शुरुआत की, एक ऐसा स्कूल जिसमे टीचर की आवश्यकता ही न हो।

मिलिए बंगलुरु की इस २२ वर्षीय ऑटो चालिका से जो आईएएस की तैयारी भी कर रही है !

२२ वर्षीय येलम्मा, जो एक बच्चे की माँ भी है, अपना गुज़ारा ऑटो रिक्शा चला कर करती है । यही नहीं, इसके साथ ही अपने सपनो को पूरा करने के लिए वो आईएएस की तैयारी भी कर रही है। आईये पढ़ते है येलम्मा की प्रेरक कहानी!

पुणे से एस्टोनिया तक बस एक विचार को साथ लिए बदलाव की नयी परिभाषा लिख रहे है तरुण !

ज़रूरी नहीं कि हमारे पास कई संसाधन हों या कोई बड़ा प्लान दिमाग में हो। अच्छाई इनके बिना भी बांटी जा सकती है। ज़रूरत है सिर्फ एक नेक सोच और एक वाक्य "- you're perfect" की, जो हर राह चलते आम इंसान के अन्दर ये आत्मविश्वास पैदा करे कि वे जैसे हैं.. वैसे ही अच्छे हैं.. । बिना किसी धारणा के, बिना किसी पक्षपात के।

ट्रैफिक पुलिस का शुक्रिया अदा करके, सुलझाये ट्रैफिक की समस्या !

भारत में हर कोई ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहा है। आप पूछेंगे कि इसमें नया क्या है? नया है – एक इंसान की सोच जिसने, इन समस्याओं से उतने ही परेशान रह रहे ट्रैफिक पुलिस का दर्द समझा और हर दुसरे व्यक्ति की तरह उनसे शिकायत करने की बजाय उन्हें धन्यवाद कहने का एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला।

बिना किसी डिग्री के छोटे छोटे आविष्कार करके गिरीश बद्रगोंड सुलझा रहे है किसानो की मुश्किलें !

बीजापुर जिल्हे के २८ वर्षीय गिरीश बद्रगोंड २००६ जब बंगलुरु आये, तब उनके साथ एक लैपटॉप, वायरलेस राऊटर और जेब में कुछ पैसे थे। पर आज उन्होंने कृषि क्षेत्र में काम आने वाले कई उपकरणों का आविष्कार करके खेती- किसानी को एक नयी राह दिखाई है।

एक अमरीकी जो भारत आकर भारत का ही बन गया और अब दुसरो को भी यहाँ आने के लिए प्रेरित कर रहा है

ट्रॉय अर्सटलिंग केवल ६ महीने के लिए भारत आये थे पर हमेशा के लिए यही के होकर रह रह गए। भारत को ही अपनी कर्मभूमि बनाकर इस अमरीकी ने न सिर्फ यहाँ एक कंपनी खोली बल्कि दुसरे विदेशी तथा प्रवासी भारतीयों को भी यहाँ वापस आने के लिए प्रेरित कर रहे है।