अखबार बेचने से लेकर आइआइटी तक – सुपर 30 की शिवांगी का सफ़र !

जब शिवांगी काफी छोटी थी तब अपने पिता के साथ अखबार बेचती थी। वह एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ती थी। इंटर तक की पढा़ई करने के बाद वह पिता के काम को पूरी तरह से संभाल चुकी थी। इस दौरान एक दिन उसे सुपर 30 के बारे में पता चला। वह अपने पिता के साथ आनंद कुमार से मिली और उनका सेलेक्‍शन सुपर 30 में हो गया।

केरल के एक बस कंडक्टर द्वारा बनाये एक फेसबुक ग्रुप से मिल रहा है हज़ारो को जीवन दान !

आजकल हमारी वास्तविक दुनिया, आभासी दुनियां यानी इंटरनेट पर सरकती जा रही है। सामाजिक चर्चाओं से लेकर अहम् आन्दोलनों के उभरने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रहने लगी है। सोशल मीडिया पर कई बार आरोप लगता है कि इसमें सामाजिक जैसा कुछ है ही नहीं। लेकिन ये कहानी आपको दुबारा सोचने पर मजबूर कर देगी। आप भी सोचेंगे कि सोशल मीडिया पर वक़्त की बर्बादी ही नहीं हम वक़्त का सबसे मूल्यवान काम ले सकते हैं।