कैंसर ने दृष्टि छीनी, पर आईएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं नागपुर की भक्ति घटोळे!

नागपुर की भक्ति घटोळे की नौ साल की उम्र में ही कैंसर ने दृष्टि छीन लीं, लेकिन फिर भी उनके सपने और जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया और आज भक्ति सफलता के स्तम्भ स्थापित करते हुए अपने आइएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं।

परिस्थिति के आगे घुटने न टेक, संपन्न और शिक्षित उर्वशी ने खोला छोले कुलचे का ठेला!

उर्वशी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक फेसबुक पोस्ट उनके जीवन को बदल देगा| इनकी कहानी फेसबुक पर छा गयी और जल्दी ही इनके ठेले पर पूरे गुडगाँव से लोग आने लगे|

पुरे गाँव की मदद से एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने आइआइटी में पढाई की और आज है गूगल में इंजिनियर!

जब एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे को भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश का अवसर मिला तो कैसे पूरे कस्बे ने आगे आकार उनकी मदद की; और आज वह गूगल के सिएटल  स्थित कार्यालय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।

स्वामी विवेकानंद के 10 प्रेरणादायक विचार जो आपको जीने की नयी राह देंगे!

आज भी, जब भारत का अधिकांश युवावर्ग नौकरी करने में नहीं बल्कि अपना कोई व्यवसाय शुरू करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है तब स्वामी विवेकानंद के विचार उन्हें सही रास्ता दिखने में बहुत सहायक हो सकते है।

उंगलियाँ गंवाने पर भी नहीं छोडा मोची का काम; साहस और स्वाभिमान की मिसाल है दिल्ली के दिनेश दास!

दिनेश पेशे से मोची है और दिल्ली के द्वारका इलाके के एक सड़क के किनारे बैठकर पिछले बीस सालो से अपना काम करते आ रहे है। चाहे होली हो या दिवाली, चाहे ईद हो या क्रिसमस, सड़क के इसी धुल भरे किनारे पर दिनेश आपको धुप, बारिश, सर्दी या गर्मी में अपना काम करते नज़र आ जायेंगे। पर जो नज़र नहीं आएँगी वो है उनकी उँगलियाँ।

पुणे के प्रकाश केलकर, किसानो और सैनिकों को दे रहे है अपने जीवन भर की पूँजी!

भारत में अधिकतर लोगो को बचत करने की आदत है। जहाँ इस बचत का एक हिस्सा बच्चो की पढाई, शादी और अन्य खर्चो के लिए रखा जाता है, वहीँ इसका एक बड़ा हिस्सा हम अपने बुढापे के लिए संभाले रखते है। पुणे के रहने वाले 73 वर्षीय प्रकाश केलकर ने भी अपनी सारी उम्र यहीं किया।लेकिन अब उन्होंने अपनी सारी कमाई जवानों, किसानों और कुछ एनजीओ को देने का फैसला किया है।

अखबार बेचने से लेकर आइआइटी तक – सुपर 30 की शिवांगी का सफ़र !

जब शिवांगी काफी छोटी थी तब अपने पिता के साथ अखबार बेचती थी। वह एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ती थी। इंटर तक की पढा़ई करने के बाद वह पिता के काम को पूरी तरह से संभाल चुकी थी। इस दौरान एक दिन उसे सुपर 30 के बारे में पता चला। वह अपने पिता के साथ आनंद कुमार से मिली और उनका सेलेक्‍शन सुपर 30 में हो गया।

बानू शेख सफी : एक कचरा बिनने वाली से एक कामयाब नर्स बनने का सफ़र!

एक कचरा बिनने वाली से एक कामयाब नर्स बनने का सफ़र बानू शेख सफी के लिए इतना आसान नहीं था। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रविदास नगर की रहने वाली बानू जब सिर्फ तीन साल की थी तब उनके पिता का देहांत हो गया। जिस उम्र में बच्चे अपने जीवन का पहला पाठ पढ़ते है, उस उम्र में बानू को जिंदगी को कई सबक एक साथ सिखा दिए। नन्ही सी बानू को अपने परिवार का पेट पालने के लिए अपनी माँ और डेढ़ साल की छोटी बहन, शमा के साथ कचरा बीनने का काम शुरू करना पड़ा।

मल उठाने वालो को सम्मान से जीना सिखाने वाले बेज़वाड़ा विल्सन को मिला रेमन मैगसेसे पुरस्कार !

बेज़वाड़ा विल्सन को इस साल, एशिया का नोबेल कहे जाने वाले प्रतिष्टित 'रेमन मैगसेसे पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें मानव मल साफ करने वाले श्रमिकों के उद्धाऱ के प्रति अपूर्व योगदान के लिए दिया गया। बेजवाड़ा कहते हैं कि वे तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक मल उठाने वाला आखिरी व्यक्ति भी अपना काम न छोड़ दे।

पिता के साथ जेल में रहकर की IIT की तैयारी और 453 रैंक हासिल किया!

जेल में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करना और IIT JEE में 453 रैंक पाना – 18 साल के पीयूष के लिए सफर मुश्किल था, पर उसकी मेहनत और लगन के कारण नामुमकिन नहीं था।

युवा प्रेरणा यात्रा: गांव, युवा और रोजगार को जोड़ने की एक अनोखी पहल!

युवा प्रेरणा यात्रा में हर साल करीब 100 युवाओं की टोली को असल जिंदगी के नायक चैंपियन्स से मिलाते है ताकि ये युवा भी दूसरों के लिए मिसाल बन सके।

अपने काम के प्रति इन पुलिस कर्मियों के समर्पण को देखकर, आदर से आपका सर खुद-ब-खुद झुक जायेगा!

इस चिलचिलाती गर्मी में, जब सडकें तप रही है, जाम में फंसी गाड़ियां हॉर्न बजा रही हो और इनके बीच ही कई घंटों तक का काम करना हो, तो यकीनन यह किसी भी रूप में आसान नहीं कहलायेगा। पर ऐसी ही स्थिति से रोज़ जूझ रहे ट्रैफिक पुलिस वालों की तरफ हमारा ध्यान यदा कदा ही जाता है। और यदि खुद को उनकी जगह खड़ा करें तो हमे समझ भी आएगा कि यह कार्य वास्तव में प्रशंसनीय है। ऐसी ही प्रशंसा के काबिल वो पुलिसवाले भी हैं जो ड्यूटी पर हो या न हो.. अपना फ़र्ज़ निभाने से कभी पीछे नहीं हटते।

शोषण से स्टंट तक का सफर – मिलिए दीपिका पादुकोण की बॉडी डबल से !

गीता बॉलीवुड की सफल स्टंट वुमेन है। कई फिल्मों में बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियों के डबिंग किरदार भी निभाए हैं, जिनमे करीना कपूर, बिपाशा बासु और दीपिका पादुकोण भी शामिल हैं। गीता दो बच्चों की बहादुर माँ है। टीवी के कई जोखिम भरे रियलिटी शोज में काम कर चुकी हैं. लेकिन इस सफल गीता की कहानी इतनी आसान नहीं रही है।

हाथ नहीं है इसलिए पैरों से डालते हैं वोट, केरला के आब्दु समद !

हम सब बदलाव की बात तो बहुत करते हैं, लेकिन जब बदलाव के लिए कदम उठाने का असल वक्त आता है तो घर बैठकर छुट्टी मना रहे होते हैं। हर दिन खीज और झल्लाते परिस्थितयों को बदलने के लिए हम एक बटन दबाने के लिए घरों से नहीं निकलते हैं।

दोनों हाथो और पैरो को गंवाकर भी नहीं गंवाया हौसला – दौड़ी 10 किमी मैराथन !

शालिनी सरस्वती के दोनों हाथ-पैर नहीं हैं लेकिन वे मैराथन में दौडी हैं। शालिनी ने रविवार को 'TCS World 10K' में दस किलोमीटर की रेस दौड़ी है।