अब भुबनेश्वर की झुग्गियों में मिलेगा साफ़ पानी; वो भी एटीएम से!

हवा के बाद यदि जिंदा रहने के लिये किसी चीज़ की सबसे अधिक आव्यशकता होती है तो वो है -पानी! पर इंसान ने तरक्की के नाम पर जीवन यापन की इन दोनों सबसे ज़रूरी चीजों को ही दूषित कर दिया है। और अब हाल ये है कि किसी समय पर प्रकृति की अपार दें माना जाने वाले पानी को भी आज हम खरीदकर पीते है। पर क्या कभी आपने सोचा है कि जो लोग बमुश्किल दो वक़्त की रोटी कमा पाते है वो पानी कैसे खरीदते होंगे?

पानी की हर एक बूंद बचाने के लिए खुद घर घर जाते है ८० साल के आबिद सुरती!

“अगर मैं कर सकता हूँ, तो आप भी कर सकते है। ” ये शब्द हैं अस्सी वर्षीय आबिद सुरती के। आबिद हर रविवार मुंबई के अपार्टमेंट एवं बिल्डिंगों के चक्कर काटते हैं पानी की हर उस बूँद को बचाने, जो कहीं भी टूटी हुई नल से बर्बाद हो रहा हो।