मुंबई में बना देश का पहला बीज कोष (Seed Bank ) !

सोसायटी फॉर एनवायर्नमेंट कंज़रवेशन एंड रीसर्च (SECR) और इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस मिलकर मुंबई में एक बीज कोष (सीड बैंक ) बना रहे हैं।

क्यूँ कभी बीमार नहीं पड़ते हरी और आशा – जाने इनकी जीवनशैली !

बाहर का तापमान 40 डिग्री होने के बावजूद भी यह दम्पति एक ऐसे घर में रह रहा है, जहा एक भी पंखा नहीं है। यह जगह एक जंगल की तरह विकसित है जहाँ किसी भी तरह का शहरी शोरगुल नहीं है। इन लोगों ने अपने लिए एक ऐसा माहौल बनाया है जो प्रकृति के बेहद करीब है। और इनकी इस कठोर परिश्रम का फल इन्हें अपने अच्छे स्वास्थ्य के रूप में मिला है। पिछले 17 सालो में इस दंपत्ति को एक बार भी दवाई की ज़रूरत नहीं पड़ी है।

अनपढ़ होते हुए भी किंकरी देवी ने जलाई शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता की मशाल !

किंकरी देवी - हिमाचल प्रदेश की एक ऐसी पर्यावरण की रक्षक जिन्होंने चूना-पत्थर खदानों के खिलाफ एक जंग छेड़ी। सिमौर जिले की रहने वाली इस साधारण महिला ने जब खदानों के कारण वातावरण में हो रहे दुष्परिणामो को देखा तो अनपढ़ होने के बावजूद, इन खदानों के मालिको को वो कोर्ट तक ले कर गयी। आइये जानते है इनके संघर्ष और बहादुरी की कहानी।

एक व्यक्ति जिसने केरल में ३२ एकड़ बंजर ज़मीन को बना डाला एक लहलहाता जंगल !

ज़ों ज़्योनो द्वारा १९५३ में लिखी गयी कथा "द मैन हू प्लांटेड ट्रीज " एल्ज़ार्ड बूफीये नामक एक चरवाहे की कहानी है जिसने समस्त अल्पाइन घाटी में वृक्षारोपण कर, एक वन का पुन्हनिर्माण कर, उसे सजीव कर डाला था। यह तो हमें ज्ञात नहीं कि बूफीये कोई काल्पनिक किरदार है या वास्तविक, परन्तु इस कथा की तर्ज़ पर केरला के कासरगोड़ ज़िले में रहने वाले एक व्यक्ति ने यथार्थ में यह कर दिखाया। एक व्यक्ति जिसने बत्तीस एकड़ बंजर भूमि खरीद कर उसपर वृक्षारोपण किया और उसे हरा-भरा बना डाला।

पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ, कचरा उठाने वाले अब करेंगे सम्मानपूर्ण नौकरी !

आर्थिक विकास और शहरीकरण की देन है, हर तरफ लगा कचरे का अम्बार। पर एक एनजीओ प्रयासरत है कचरे को बेहतर तरीके से ठिकाने लगाने में हमारी मदद करने में , कचरा उठाने वालों को बेहतर जीवन प्रदान करने में और कचरे को रीसायकल (दुबारा इस्तेमाल करने लायक) कर के वातावरण को साफ रखने में।

चंडीगढ़ हवाई-अड्डा बना भारत का पहला इको फ्रेंडली हवाई-अड्डा!

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हाल ही में उद्घाटन किया गया चंडीगढ़ हवाई-अड्डा देश का पहला हवाई-अड्डा है, जो सरकार के -मेक इन इंडिया कैंपेन का एक बहोत अच्छा उदाहरण बन सकता है। क्योंकि यह हवाई अड्डा पर्यावरण संरक्षण की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता है।

इस गणेश चतुर्थी पर करे पर्यावरण की रक्षा भी और एक घायल हाथी की सहायता भी

गणेश चतुर्थी के दौरान लाखो प्लास्टिक तथा प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की बनी गणपति की मूर्तियाँ तालाबो तथा नदियों मे विसर्जित की जाती है। परन्तु एक संस्था ऐसी है जो की आपको न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियाँ दिलाने में मदत करती है, बल्कि उनका विसर्जन भी जिम्मेदारी से करने में सहायता करती है। इतना ही नहीं आप इन मूर्तियों की घुली हुई मिटटी को भी दुबारा इस्तेमाल कर सकते है।