आज़ादी की नयी परिभाषा सिखाते, राष्ट्रगीत गाते हिजड़े

'हिजड़ा' ये शब्द सुनते ही हमारे ज़हन में एक ऐसे शख्स की तस्वीर उभरती है जो शादी ब्याह में या बच्चे के जन्म पर नाच गाकर पैसे मांगते है। या बसो और ट्रेनों में बददुआ देने की धमकी देकर पैसे ऐंठते है। हम अक्सर इन लोगो के साये से भी घबराते है। पर कभी आपने सोचा है की हमारी ही तरह हाड़ माँस के शरीर वाले, हमारी ही तरह सोच विचार करने वाले और हमारी ही तरह हँसने बोलने वाले ये लोग आज़ादी के इतने सालो बाद भी इसी तरह जीने को क्यों बाधित है?