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मोबाइल क्रेचएस: निर्माण कार्य से जुड़े मज़दूरो के बच्चो की देखभाल करता पालना घर

यदि मैं आपसे एक बच्चे की कल्पना करने को कहूँ, तो आपको क्या नज़र आएगा? ज़ाहिर है आप कहेंगे, एक हँसता, खिलखिलाता हुआ चेहरा, एक उर्जा से भरी हुई हँसी, भविष्य के सपनो से भरी हुई दो आँखें और एक चिंतामुक्त जीवन. पर यदि यह कल्पना एक ज़मीन पर पड़े हुए, धूल मिट्टी से भरे, दूध के लिए बिलखते बच्चे से बदल जाए तो? देश के हज़ारो निर्माण कार्य से जुड़े मज़दूरो के बच्चो के लिए कड़वा ही सही पर यही सच है. ये बच्चे ऐसे ही धूल मिट्टी से भरा बचपन जीने के लिए मजबूर है. और इन बच्चो के माँ बाप भी ग़रीब और लाचार होने के कारण इन्हे ऐसा ही जीवन दे सकते है. ऐसे मे इन बच्चो की देखभाल कैसे हो? कैसे सावांरा जाए इनके फूल से बचपन को?