मुंशी प्रेमचंद के ऐतेहासिक घर को बचाया इस प्रोफेसर तथा उनके छात्रों ने !

सन २००५-२००६ में मुझे यूनिवर्सिटी के कुछ विद्यार्थीयो को पढ़ाने का मौका मिला। एक विषय का असर इस तरह से हुआ कि सभी विद्यार्थीयो की सोच बदल गयी और साहित्य जगत में बड़ा बदलाव हुआ।