‘आजादी’ के असल मायने साकार करती झारखंड की ग्रामीण महिलाएं!

गांव की इन महिलाओं ने आजादी को अपना ब्रांड बनाया है। आईए हम और आप इन महिलाओं से जुड़कर इनके गरीबी मुक्त झारखण्ड के सपने को धरातल पर उतारने में मदद करें और इस स्वतंत्रता दिवस par इनके ब्रांड - 'आजादी' को प्रोत्साहित करें।

‘तितलियां’ – युवाओं की एक पहल जो झुग्गी के बच्चों की बेरंग ज़िन्दगी में रंग भर रही है!

बच्चे, बचपन और उनके चेहरे की मुस्कान को बचाने के लिए रांची में युवाओं की एक टोली आगे आई है। तितलियां नाम की संस्था रांची के युवा बिजनसमैन अतुल गेरा ने स्थापित की है। इस संस्था से रांची के कई युवा जुड़े है जो गरीब बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए लगातार काम कर रहे है। मिलिए इन युवाओं की टोली से जो अपने जज्बे से रांची के झुग्गियों में रहने वाली बच्चियों की बेरंग जिंदगी में अपने जज्बे से रंग भर रहे है।

डिजिटल गांव के सपने को साकार करती, झारखंड की टैबलेट दीदी!

गोद में बच्चा और हाथो में टैबलेट ये नजारा झारखंड के गांवों में आम है, झारखंड के सुदूर गांवों की ये महिलाएं अपने घर- परिवार बच्चों का ध्यान रखने के साथ-साथ अपने घर को चलाने के लिए खूब मेहनत करती है। हाथ में टैबलेट लिये ये महिलाएं है झारखंड की 'टैबलेट दीदी'।

कभी नक्सली रह चुकी यह महिला, आज संवार रही है अपनी ज़िन्दगी !

जिस उम्र में बच्चे खेलते कूदते और पढ़ते है उस उम्र में शुगनी (बदला हुआ नाम) को नक्सली उसके घर से उठाकर ले गए। 9 साल की उम्र से करीब 7 साल तक शुगनी ने अपनी जिंदगी नक्सलियों के साथ काटी। लेकिन परिवारवालों की सहायता और अपनी हिम्मत के बलबूते पर आज शुगनी एक सामान्य जीवन जी रही है।