ओझा ने बताया था कि उनके बेटे में बुरी आत्मा है – और फिर शुरू हुई उनकी लड़ाई, इस अंधविश्वास के खिलाफ !

बिरुबाला - एक साठ-सत्तर साल की महिला। भारत के एक सबसे पिछड़े माने जाने वाले गाँव में रहनेवाली। बस नाम मात्र पढ़ी लिखी। आर्थिक तौर पर बेहद गरीब। और समाज की सताई हुई। पर समाज से अंधविश्वास मिटाने के लिए इस महिला ने जो करके दिखाया है उसकी आप कल्पना भी नहीं सकते। इन्द्राणी रायमेधी की लिखी और सेज (Sage) द्वारा प्रकाशित किताब 'माय हाफ of द स्काई' से लिए कुछ अंश से जाने भारत की इस वीरांगना की कहानी।