कलाम की कहानी गुलज़ार की जुबानी !

'परवाज़' गुलज़ार की आवाज़ में डॉ. कलाम की आत्मकथा है। इस ऑडियोग्राफी का एक-एक शब्द रौंगटे खड़े कर देने वाला है। गुलज़ार साहब की आवाज़ में 'परवाज़' को सुनकर अब्दुल कलाम भी रो पड़े थे। पेश है ‘परवाज़’ से गुलज़ार के शब्दों में डॉ.कलाम के जीवन के कुछ अंश।