हाथ नहीं है इसलिए पैरों से डालते हैं वोट, केरला के आब्दु समद !

हम सब बदलाव की बात तो बहुत करते हैं, लेकिन जब बदलाव के लिए कदम उठाने का असल वक्त आता है तो घर बैठकर छुट्टी मना रहे होते हैं। हर दिन खीज और झल्लाते परिस्थितयों को बदलने के लिए हम एक बटन दबाने के लिए घरों से नहीं निकलते हैं।