ग्रीन ग्रुप से महिलाओं को सशक्त बनाकर गाँवो में उम्मीद रोपते ‘होप’ समूह के छात्र

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने होप नाम की एक संस्था बनाई है, जिसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के साथ काशी विद्यापीठ, दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र और प्रोफेसर जुडकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. ये छात्र गांवों में जाकर वहाँ की समस्याओं को अपने बेहतर आइडिया से समाधान में बदल रहे हैं.

सतत विकास की और बढ़ते कदम: 15 ऐसे गाँव जिन्हें देखकर आपका मन करेगा अपना शहर छोड़ यहाँ बस जाने को!

कुछ गाँव ऐसे है जो सुविधाओं में किसी शहर से कम नहीं है पर उनके मूल में वही भारतीय ग्रामीण संस्कृति बसती है। यह कुछ ऐसे गाँव है जो ना सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में पूरी तरह से आत्मनिर्भर है, साथ ही मानव जाति व प्रकृति के बीच किस तरह अद्भुत सामंजस्य बनाया जा सकता है, इसकी मिसाल पेश करते हैं।

सरकारी स्कूल की ईमारत गिरा दिए जाने पर गांववालों ने मिलकर किराये के मकान में चलाये रखा स्कूल!

सिर्फ ईमारत न होने के कारण गाँव का ये एकमात्र स्कूल बंद न हो जाए इसलिए गांववालों ने मिलकर ये फैसला लिया।

इंग्लैंड में अपनी ऐशो-आराम की ज़िन्दगी छोड़, भारत के गाँवों को बदल रहे है ये युवा दंपत्ति!

2014 में एक पति पत्नी का जोड़ा इंग्लैंड में अपनी ऐशो आराम की ज़िन्दगी छोड़कर भारत वापस आ गया। वापस आकर इन्होने न सिर्फ कई गाँवों को नशामुक्त कराया बल्कि अब एक गाँव के हर घर में शौचालय बनवाने की मुहीम में भी जुटे हुए है।

कर्नाटक की लक्ष्मी, जिसने उम्र भर की जमा पूंजी गाँव के लिए कुआँ खुदवाने में खर्च कर दी!

कर्नाटक के बेहद सुदूर हिस्से में बसे एक गाँव में पेंशन के सहारे बेहद कम साधनों में अपनी जीविका चलनेवाली एक महिला ने अपनी पेंशन से मिलने वाली रकम बचाकर गाँव के लोगो के लिए एक कुआँ खुदवाया है।

जानिये कैसे आम सेवा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस की क्रांति ला रहे हैं !

समूचे देश में ऐसे ग्रामीणों की संख्या बढती जा रही है जो आम सेवा केन्द्रों पर जाकर सरकारी दफ्तरों की लम्बी लाइन से बच रहे हैं। ये आम सेवा केंद्र ई-गवर्नेंस के केन्द्रों की तरह काम करते हैं।

अपनी आधी तनख्वाह गरीब छात्रों की किताबो में खर्च कर देता है यह कोलकाता का यह शिक्षक !

हावड़ा के सरकारी स्कूल में टीचर ध्रुबज्योति सेन अपनी तनख्वाह के आधे पैसे से ऐसे बच्चों को पढ़ने में मदद करते है। ध्रुबज्योति गणित पढ़ाते हैं और ऐसे बच्चों के लिए आज हरदम तैयार खड़े हैं। दसवीं पास कर चुके ऐसे छात्र जो विज्ञान में रुचि रखते हैं, उन्हें ध्रुबज्योति निशुल्क पढ़ाते हैं।

अमेरिका में २ लाख प्रति माह की नौकरी छोड़, अपने गाँव की सेवा में लगा है ये ‘यंग गाँधी’!

तमिल नाडु के थेंनुर गाँव में रहने वाले सेंथिल गोपालन किसी भी गाँव वाले की तरह सादगी की ज़िन्दगी जी रहे है। फिर इस आम से दिखने वाले गाँव के साधारण नागरिक में ऐसा क्या है की लोग उन्हें 'यंग गांधी' याने की 'युवा गांधी' कहकर बुलाते है?