अखबार बेचने से लेकर आइआइटी तक – सुपर 30 की शिवांगी का सफ़र !

जब शिवांगी काफी छोटी थी तब अपने पिता के साथ अखबार बेचती थी। वह एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ती थी। इंटर तक की पढा़ई करने के बाद वह पिता के काम को पूरी तरह से संभाल चुकी थी। इस दौरान एक दिन उसे सुपर 30 के बारे में पता चला। वह अपने पिता के साथ आनंद कुमार से मिली और उनका सेलेक्‍शन सुपर 30 में हो गया।

एक युवा का फेसबुक पेज कैसे हजारो बच्चो के चेहरे पर मुस्कान बिखरे रहा है!

सड़क पर जन्म लेने वाले और अपनी सारी जिन्दगी इन्ही सडको के किनारे बिता देने वाले अनाथ और बेसहारा बच्चो को कई बार अपने माता पता तक का पता नहीं होता तो अपने जन्मदिन दिन का पता होना तो बहुत दूर की बात है। पर एक शख्स ने, जन्मदिन का पता न होने पर भी इन बच्चो का जन्मदिन मनाने का एक बेहतरीन तरीका ढूंड निकाला है।