बिना मिट्टी के खेती की इस अनोखी तकनीक से संकट से उबर सकते है किसान!

कनिका ने क्लेवर बड की स्थापना की है, जो खेती करने के ऐसे तरीके पर काम करती है, जिससे न सिर्फ फसलों की गुणवत्ता अच्छी होती है, बल्कि फसलें कहीं भी कभी भी आसानी से उगाई जा सकती हैं और वो भी बिना कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग के। इतना ही नहीं फसलें बिना मिट्टी के भी उगाई जा सकती हैं।

मिलिये इस किसान से जिसने चावल की 850 से भी ज्यादा किस्मों को सहेज कर म्यूज़ियम बना डाला।

मांड्या जिले के छोटे से गाँव में रहने वाले सैयद गनी खान एक संग्रहालय (म्यूज़ियम) में संरक्षक है। उन्होंने एक अनूठी पहल की और एक ऐसा म्यूज़ियम तैयार कर दिया जहां आज चावल की 850 व 115 के आसपास आम की विभिन्न किस्मों को ना सिर्फ संरक्षित किया गया है, बल्कि उनकी खेती भी की जाती है।

किसानों की समस्या को ही बना दिया समाधान, सूखे और भारी बारिश के लिए खोजी अनोखी तकनीक

हमारे देश में खेती के लिए लम्बे समय तक बारिश न होने या अचानक बेमौसम होने वाली बारिश से फसलों की बर्बादी होती है जिसकी मार किसान को झेलनी पड़ती है। लेकिन इसका समाधान निकाला अहमदाबाद की एक सामाजिक संस्था ने अनौखी जल सरंक्षण प्रणाली खोजकर!

शहर के थकान भरे अस्त-व्यस्त जीवन को छोड़ इस परिवार ने केरल में रखी प्रदूषण मुक्त गाँव की नींव!

ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के बढ़ते कहर के बारे में जहाँ एक तरफ हम सिर्फ चिंता कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केरल के कुछ परिवार जुटे हैं एक जैविक गाँव बनाने में। मोहन चावड़ा के मार्गदर्शन में बन रहा यह गाँव एक प्रेरणा हैं आने वाली पीढ़ियों को एक खूबसूरत दुनिया सौंपने का और बेहतर भारत बनाने का।

जानिये कैसे सरकारी नौकरी छोड़, ये इंजिनियर, खेती करके बना करोड़पति !

ज़िन्दगी में अगर कुछ बड़ा हासिल करना हो तो छोटे-छोटे जोख़िम उठाने ही पड़ते है । कुछ ऐसा ही किया एक 24 वर्षीय इंजीनियर हरीश धनदेव ने। इन्होंने 2013 में अपनी अच्छी तनख़्वाह वाली सरकारी नौकरी छोड़ दी और एलोवेरा ( घृतकुमारी ) की खेती करने लगे। आज वह एक कंपनी के मालिक हैं जिसका कारोबार करोड़ो में है।

इस राखी में लगे बीज को बोयियें और जुड़े रहिये इन्हें बनाने वाले किसानो और बुनकरों से !

ग्राम आर्ट प्रोजेक्ट ने खास राखियाँ तैयार की हैं जो उन्हें बनाने वाले कामगरों की कहानी कहती हैं। पहली बार ग्राहक उन किसानो से जुड़ेंगे जिन्होंने इस राखी के लिए कपास उगाया है और उन बुनकरों को जानेगे जिन्होंने इसके धागे बुने है।

मोबाइल ऐप से अब सस्ते किराये पर कृषि यन्त्र ले सकेंगे कर्नाटक के किसान !

कृषि में भी अब टेक्नोलोजी के प्रयोग को बढ़ावा मिल रहा है। टेक्नोलोजी के प्रयोग से अन्नदाता के लिए आसानी से सुविधाएँ मुहैया कराने से पैदावार तो बढ़ ही रही है, साथ ही खेती की तरफ युवा पीढ़ी के जुडाव की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। ऐसे ही एक प्रयोग के माध्यम से कर्नाटक सरकार राज्य के किसानों को सस्ती दर पर कृषि यन्त्र मुहैया कराने की योजना पर काम कर रही है।

‘काऊइस्म’ – स्वदेशी गाय हो सकती है किसानो की हर समस्या का हल !

काऊइसम (Cowism), कंप्यूटर इंजिनियर, चेतन राउत द्वारा शुरू किया गया एक स्टार्ट अप है। चेतन का मानना है कि खेती के साथ साथ स्वदेशी गाय पालन ही किसानो की आत्महत्या रोकने का एकमात्र उपाय है।

बिना किसी डिग्री के छोटे छोटे आविष्कार करके गिरीश बद्रगोंड सुलझा रहे है किसानो की मुश्किलें !

बीजापुर जिल्हे के २८ वर्षीय गिरीश बद्रगोंड २००६ जब बंगलुरु आये, तब उनके साथ एक लैपटॉप, वायरलेस राऊटर और जेब में कुछ पैसे थे। पर आज उन्होंने कृषि क्षेत्र में काम आने वाले कई उपकरणों का आविष्कार करके खेती- किसानी को एक नयी राह दिखाई है।

मधुमक्खियाँ बढा रही है फसल की पैदावार – देखिये कैसे !! ‍

अंडर द म्यंगो ट्री (UTMT) ने फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन की शुरुवात की। कम खर्चे वाली इस तकनीक ने फसल को दोगुना करने जैसा अदभुत करिश्मा करके दिखाया।