मिलिए माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए प्रख्यात कुमारटूली की पहली महिला मूर्तिकार से !

चायना 17 साल की उम्र से इस कला से जुड़ी हुई है। इस कला पर पुरुषो की अधिक सत्ता होने के बावजूद उन्होंने इस क्षेत्र में अपना एक अलग मकाम बनाया है।

अपने काम के प्रति इन पुलिस कर्मियों के समर्पण को देखकर, आदर से आपका सर खुद-ब-खुद झुक जायेगा!

इस चिलचिलाती गर्मी में, जब सडकें तप रही है, जाम में फंसी गाड़ियां हॉर्न बजा रही हो और इनके बीच ही कई घंटों तक का काम करना हो, तो यकीनन यह किसी भी रूप में आसान नहीं कहलायेगा। पर ऐसी ही स्थिति से रोज़ जूझ रहे ट्रैफिक पुलिस वालों की तरफ हमारा ध्यान यदा कदा ही जाता है। और यदि खुद को उनकी जगह खड़ा करें तो हमे समझ भी आएगा कि यह कार्य वास्तव में प्रशंसनीय है। ऐसी ही प्रशंसा के काबिल वो पुलिसवाले भी हैं जो ड्यूटी पर हो या न हो.. अपना फ़र्ज़ निभाने से कभी पीछे नहीं हटते।

केरल के एक छोटे से गाँव से निकल सौ करोड़ की कंपनी के मालिक बनने का सफ़र!

ये कहानी है पी सी मुस्तफा की जो एक छोटे से गाँव से है जहां बिजली तक नहीं थी। पिता चौथी तक पढ़े, माँ कभी स्कूल गई ही नहीं और वे खुद छटवी में फेल हो गए पर इसके बाद मुस्तफा ने एनआईटी, कोलकाता से लेकर आई आई एम बेंगलोर से पढाई की और सौ करोड़ का कारोबार खडा कर लिया।ऐसी कहानियां हमारे निराश मन के इंजन में ईंधन का काम करती हैं। और हम प्रेरित होकर खुद ब खुद चल पड़ते हैं।

रुढीवादी मान्यताओ को तोड़ते हुए कोलकाता ने स्वीकारी देश की पहली ट्रांसजेंडर दुर्गा की प्रतिमा !

दुर्गा पूजा के इतिहास में पहली बार लोग माँ दुर्गा की एक ट्रांसजेंडर प्रतिमा की पूजा करेंगे जो भगवान शिव के अर्द्धनारीश्वर अवतार से प्रेरित है। यह हाशिये पर रखे ट्रांसजेंडर समुदाय को पूजा के उत्सव में सम्मिलित करने का एक प्रयास है।