कैंसर ने दृष्टि छीनी, पर आईएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं नागपुर की भक्ति घटोळे!

नागपुर की भक्ति घटोळे की नौ साल की उम्र में ही कैंसर ने दृष्टि छीन लीं, लेकिन फिर भी उनके सपने और जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया और आज भक्ति सफलता के स्तम्भ स्थापित करते हुए अपने आइएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं।

39 साल के इस युवक का आखरी सपना था कि इनके अंतिम संस्कार के पैसो से गरीबो के लिए घर बनाया जाएँ!

39 वर्षीय राज की कैंसर के कारण हाल ही में मृत्यु हो गयी। पर जाने से पहले उन्होंने खालसा ऐड इंटरनेशनल के साथ मिल कर एक मुहीम की शुरुआत की, जिसमे उन्होंने लोगो से उनके अंतिम संस्कार पर खर्च न करते हुए गरीबो की मदद के लिए पैसे दान करने की अपील की।

ज़ंजीर: एक बहादुर कुत्ता, जिसने 1993 मुंबई बम धमाकों में हजारों लोगों की जान बचाई !

बम निरोधक दस्ते के साथ काम करते हुए 'जंजीर' ने लगभग 3329 किलोग्राम से ज्यादा आरडीएक्स विस्फोटक, 600 डेटोनेटर, 249 हैण्ड ग्रेनेड और 6000 राउण्ड्स से ज्यादा कारतूस ढूँढ निकाला। जंजीर की बहादुरी के कारण ही मुंबई में सीरियल बम धमाकों में से तीन बम धमाके टल गए और अनगिनत लोगों की जान बच गई।

कैंसर के कारण अपनी बेटी को खो देने वाली माँ बनी सैकड़ों कैंसर पीड़ितों का सहारा!

शीबा अमीर ने अपनी बेटी को कैंसर के आगे अपनी ज़िन्दगी को हारते देखा है। अपने दुःख को भुला कर अब वो कैंसर पीड़ितों की मदद अपनी संस्था “सोलेस” के द्वारा कर रही है।

सिर्फ ५० रुपये में गले के कैंसर से पीड़ित लोगो को ठीक कर रहे है बंगलूरू के डॉ. राव !

बंगलूरू स्थित डॉ. विशाल राव ने एक ऐसे चिकित्सा यंत्र की खोज की है जिससे गले के कैंसर से पीड़ित लोग सर्जरी के बाद भी ठीक से बोल सकते है। और इस यंत्र की क़ीमत सिर्फ ५० रूपये है।

एक डॉक्टर जिसने कैंसर से लड़ाई में दान कर दी जिंदगी भर की कमाई!

यूं तो आपने बहुत सारे चिकित्सको के बारे में पढ़ा और सुना होगा लेकिन समाज के हित के लिए अपनी जिंदगी भर की कमाई एक अस्पताल के निर्माण के लिए दान कर दें, ऐसे चिकित्सक देश और दुनिया में विरले ही है।

सिस्टम से लड़कर गरीब कैंसर पीड़ितो का इलाज कर रहे है महाराष्ट्र के डॉक्टर स्वप्निल माने!!

" माँ, मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनूँगा और मुफ्त में इलाज करके गरीबो की सेवा करूँगा” -अपने एक पडोसी को कैंसर से मरते हुये देखकर ८ साल के स्वप्निल माने ने अपने माँ से वादा किया। बीस साल बाद स्वप्निल ने अपने पत्नी के साथ मिलकर महाराष्ट्र के ५२ गाँवो में जाकर हजारो कैंसर ग्रस्त लोगो की मदत की है और आज तक ५५० मरीजो का मुफ्त में इलाज किया है।

सब्जियां बेचने से लेकर मशहूर डॉक्टर बनने का सफ़र – डॉ. विजयलक्ष्मी देशमाने के संघर्ष की कहानी !

ये कहानी एक ऐसी महिला की है जिसने अपनी ज़िन्दगी में कई उतार चढ़ाव देखे है। एक झोपड़पट्टी में रहकर सब्जी बेचने से लेकर एक कैंसर विशेषज्ञ बनने तक की उनकी कहानी बिलकुल अनोखी है।

कैंसर की दवाइयां अब होंगी सस्ती !!!

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जल्द ही एक ऐसा कदम उठाया जा रहा है जो कैंसर पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत सिद्ध होगा। सरकार कैंसर की दवाओं तथा उस से जुड़े उपकरणों का मूल्य निर्धारित करने पर विचार कर रही है।