शहर के थकान भरे अस्त-व्यस्त जीवन को छोड़ इस परिवार ने केरल में रखी प्रदूषण मुक्त गाँव की नींव!

ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के बढ़ते कहर के बारे में जहाँ एक तरफ हम सिर्फ चिंता कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केरल के कुछ परिवार जुटे हैं एक जैविक गाँव बनाने में। मोहन चावड़ा के मार्गदर्शन में बन रहा यह गाँव एक प्रेरणा हैं आने वाली पीढ़ियों को एक खूबसूरत दुनिया सौंपने का और बेहतर भारत बनाने का।

इस महिला ने व्हाट्स अप पर इनकी अश्लील अफवाह फैलाने वाले से अनाथ आश्रम में रु.25000 दान करवाया

श्रीलक्ष्मी के इस जानने वाले ने उनका फ़ोन नंबर व्हाट्स अप पर साझा करते हुए साथ में लिखा था कि 'ये उपलब्ध है' और उन्हें 'सुपर आइटम' लिखकर संबोधित किया था। इसके बाद श्रीलक्ष्मी को अनजान लोगो के कॉल आने शुरू हो गए।

क्रांतिकारी रह चुके 100 साल के पप्पाचन और उनकी 80 साल की पत्नी आज भी करते है अपने खेत का सारा काम!

ये कहानी है एक ऐसे क्रांतीकारी की, जिन्होंने सारी ज़िन्दगी क्रांति का रास्ता ही चुना और 100 साल की उम्र में आज भी क्रांती की मशाल जलाएं हुए है। फर्क सिर्फ इतना है कि जवानी के दिनों में उन्होंने देश को आजादी दिलाने वाले युवाओं के दिलो में क्रांति लायी थी और आज 100 साल की उम्र में केरल के उद्दुक्की जिले में खेती किसानी कर के किसान युवाओं के दिलों में क्रांति ला रहे है।

एक कदम समानता की ओर! अब केरल में ट्रांसजेंडर्स को भी मिलेगी पेंशन!

केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार ने शुक्रवार को अपने बजट में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के ट्रांसजेंडर्स के लिए पेंशन की घेषणा की है।

क्यूँ कभी बीमार नहीं पड़ते हरी और आशा – जाने इनकी जीवनशैली !

बाहर का तापमान 40 डिग्री होने के बावजूद भी यह दम्पति एक ऐसे घर में रह रहा है, जहा एक भी पंखा नहीं है। यह जगह एक जंगल की तरह विकसित है जहाँ किसी भी तरह का शहरी शोरगुल नहीं है। इन लोगों ने अपने लिए एक ऐसा माहौल बनाया है जो प्रकृति के बेहद करीब है। और इनकी इस कठोर परिश्रम का फल इन्हें अपने अच्छे स्वास्थ्य के रूप में मिला है। पिछले 17 सालो में इस दंपत्ति को एक बार भी दवाई की ज़रूरत नहीं पड़ी है।

केरल के एक बस कंडक्टर द्वारा बनाये एक फेसबुक ग्रुप से मिल रहा है हज़ारो को जीवन दान !

आजकल हमारी वास्तविक दुनिया, आभासी दुनियां यानी इंटरनेट पर सरकती जा रही है। सामाजिक चर्चाओं से लेकर अहम् आन्दोलनों के उभरने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रहने लगी है। सोशल मीडिया पर कई बार आरोप लगता है कि इसमें सामाजिक जैसा कुछ है ही नहीं। लेकिन ये कहानी आपको दुबारा सोचने पर मजबूर कर देगी। आप भी सोचेंगे कि सोशल मीडिया पर वक़्त की बर्बादी ही नहीं हम वक़्त का सबसे मूल्यवान काम ले सकते हैं।

कैंसर के कारण अपनी बेटी को खो देने वाली माँ बनी सैकड़ों कैंसर पीड़ितों का सहारा!

शीबा अमीर ने अपनी बेटी को कैंसर के आगे अपनी ज़िन्दगी को हारते देखा है। अपने दुःख को भुला कर अब वो कैंसर पीड़ितों की मदद अपनी संस्था “सोलेस” के द्वारा कर रही है।

एक मसीहा जिसने केरल के मछुआरों को शराब से मुक्ति दिलाकर नया जीवनदान दिया !

एफ. एम्. लेजर ने देखा कि केरल के मछुआरों में गरीबी का मुख्य कारण शराब है। फिर क्या था, उन्होंने इसको बदलने की ठान ली। इसके साथ-साथ उन्होंने महिलाओं और वृद्धों को साक्षर बनने में भी मदद की। इतना ही नही उन्होंने विकलांगो के लिए एक तिपहिया भी बनाया है। दृढ निश्चय वाले इस इंसान की मेहनत अब रंग ला रही है और इसका असर पूरे राज्य में दिख रहा है।