‘दुनिया को हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए’ केदारनाथ सिंह की उम्मीद की कवितायेँ

केदार जी की कवितायेँ हमारे देश की जमीन की कवितायेँ हैं जहाँ परम्परा-आधुनिकता, सुख-दुःख, गाँव-शहर, खेत और बाजार एक दूसरे से बतियाते नज़र आते हैं। जीवन की तमाम चुनौतियों में उम्मीद की खोज करती प्रस्तुत हैं केदारनाथ जी की दो कवितायेँ-

बिना मिट्टी के खेती की इस अनोखी तकनीक से संकट से उबर सकते है किसान!

कनिका ने क्लेवर बड की स्थापना की है, जो खेती करने के ऐसे तरीके पर काम करती है, जिससे न सिर्फ फसलों की गुणवत्ता अच्छी होती है, बल्कि फसलें कहीं भी कभी भी आसानी से उगाई जा सकती हैं और वो भी बिना कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग के। इतना ही नहीं फसलें बिना मिट्टी के भी उगाई जा सकती हैं।

कौन बनेगा करोड़पति के एक एपिसोड को देख कर मिली प्रेरणा; अब कर रहे है हज़ारो किसानों की मदद!

कौन बनेगा करोड़पति शो में आयी एक प्रतिभागी की संघर्ष की कहानी सुनी तो अभिजीत फाल्के ने विदर्भ के किसानो की मदद करने की ठानी। उन्हे कार्यशालाओं के माध्यम से न सिर्फ जैविक खेती के आधुनिक तरीके सिखाये, साथ ही बिचौलियों को समाप्त कर उन्हे सीधा ग्राहकों से जोड़ा, उनका खोया आत्मविश्वास लौटाया और आज ये किसान विदेशों में भी अपना उत्पाद बेच रहे हैं।

मिलिये इस किसान से जिसने चावल की 850 से भी ज्यादा किस्मों को सहेज कर म्यूज़ियम बना डाला।

मांड्या जिले के छोटे से गाँव में रहने वाले सैयद गनी खान एक संग्रहालय (म्यूज़ियम) में संरक्षक है। उन्होंने एक अनूठी पहल की और एक ऐसा म्यूज़ियम तैयार कर दिया जहां आज चावल की 850 व 115 के आसपास आम की विभिन्न किस्मों को ना सिर्फ संरक्षित किया गया है, बल्कि उनकी खेती भी की जाती है।

किसानों की समस्या को ही बना दिया समाधान, सूखे और भारी बारिश के लिए खोजी अनोखी तकनीक

हमारे देश में खेती के लिए लम्बे समय तक बारिश न होने या अचानक बेमौसम होने वाली बारिश से फसलों की बर्बादी होती है जिसकी मार किसान को झेलनी पड़ती है। लेकिन इसका समाधान निकाला अहमदाबाद की एक सामाजिक संस्था ने अनौखी जल सरंक्षण प्रणाली खोजकर!

फोगाट बहनों के बाद हरियाणा की इन तीन बहनों ने सेना में भर्ती होकर खड़ी की एक नयी मिसाल!

जिस तरह महावीर सिंह फोगाट ने धकियानुसी परंपराओं को ताक पर रखकर अपनी बेटियों तथा भतीजियों को पहली बार अखाड़े में भेजा था उसी तरह झज्जर के खेड़का गुर्जर गांव के किसान प्रताप सिंह देशवाल ने भी अपनी बेटी प्रीती और दीप्ती तथा अपनी भतीजी ममता को सेना में भेजा है।

एक ऐसा बाज़ार जहाँ अब आप आधार कार्ड दिखाकर सब्जियां खरीद और बेच सकते है!

500 और 1000 के नोट बंद होने के दस दिनों बाद भी लोगो की परेशानी दूर होती नज़र नहीं आ रही है। लोगों को रोज़मर्रा के ज़रूरत का सामान खरीदने में भी दिक्कत हो रही है। पर वहीँ हैदराबाद के कूकटपल्ली रायतू बाजार में माहौल कुछ और ही है। यहाँ ग्राहकों ने करीब 15000 की सब्जियां खरीदी है।पर इस बाज़ार में खरीदारी के लिए लोगों को न पुराने नोट बदलने की चिंता करनी पड़ी और न ही नए नोट न होने की वजह से परेशान होना पडा क्यूंकि यहाँ सब्जियां नोटों से नहीं आधार कार्ड से खरीदी गयी।

पुणे के प्रकाश केलकर, किसानो और सैनिकों को दे रहे है अपने जीवन भर की पूँजी!

भारत में अधिकतर लोगो को बचत करने की आदत है। जहाँ इस बचत का एक हिस्सा बच्चो की पढाई, शादी और अन्य खर्चो के लिए रखा जाता है, वहीँ इसका एक बड़ा हिस्सा हम अपने बुढापे के लिए संभाले रखते है। पुणे के रहने वाले 73 वर्षीय प्रकाश केलकर ने भी अपनी सारी उम्र यहीं किया।लेकिन अब उन्होंने अपनी सारी कमाई जवानों, किसानों और कुछ एनजीओ को देने का फैसला किया है।

एक डॉक्टर, जिन्होंने अपने गाँव में 11 डैम बनवाकर किया सूखे का इलाज!

डॉ अनिल जोशी ने अपने मरीजों की मदद करने का बीड़ा उठाया और एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से जल सरंक्षणवादी बन गए।

क्रांतिकारी रह चुके 100 साल के पप्पाचन और उनकी 80 साल की पत्नी आज भी करते है अपने खेत का सारा काम!

ये कहानी है एक ऐसे क्रांतीकारी की, जिन्होंने सारी ज़िन्दगी क्रांति का रास्ता ही चुना और 100 साल की उम्र में आज भी क्रांती की मशाल जलाएं हुए है। फर्क सिर्फ इतना है कि जवानी के दिनों में उन्होंने देश को आजादी दिलाने वाले युवाओं के दिलो में क्रांति लायी थी और आज 100 साल की उम्र में केरल के उद्दुक्की जिले में खेती किसानी कर के किसान युवाओं के दिलों में क्रांति ला रहे है।

मुंबई आकर भीख मांगने और गजरे बेचने को मजबूर किसानो के बच्चो को देश का पहला सिग्नल स्कूल दिखा रहा है जीने की नई राह !

मोहन उन हज़ारो किसानो के बच्चो में से एक है जो अपना गाँव, अपना खेत और अपना घर छोड़कर रोज़गार की तलाश में मुंबई आते है। पर यहाँ भी गरीबी और भुखमरी उनका साथ नहीं छोडती। ऐसे में शिक्षा के बारे में सोचना तक उन्हें दूर की बात लगती है। पर अब देश के पहले सिग्नल स्कूल के खुल जाने से मोहन जैसे कई बच्चो को अपने भविष्य को सुधारने का मौका मिल रहा है।

जानिये कैसे सरकारी नौकरी छोड़, ये इंजिनियर, खेती करके बना करोड़पति !

ज़िन्दगी में अगर कुछ बड़ा हासिल करना हो तो छोटे-छोटे जोख़िम उठाने ही पड़ते है । कुछ ऐसा ही किया एक 24 वर्षीय इंजीनियर हरीश धनदेव ने। इन्होंने 2013 में अपनी अच्छी तनख़्वाह वाली सरकारी नौकरी छोड़ दी और एलोवेरा ( घृतकुमारी ) की खेती करने लगे। आज वह एक कंपनी के मालिक हैं जिसका कारोबार करोड़ो में है।

इस राखी में लगे बीज को बोयियें और जुड़े रहिये इन्हें बनाने वाले किसानो और बुनकरों से !

ग्राम आर्ट प्रोजेक्ट ने खास राखियाँ तैयार की हैं जो उन्हें बनाने वाले कामगरों की कहानी कहती हैं। पहली बार ग्राहक उन किसानो से जुड़ेंगे जिन्होंने इस राखी के लिए कपास उगाया है और उन बुनकरों को जानेगे जिन्होंने इसके धागे बुने है।

मोबाइल ऐप से अब सस्ते किराये पर कृषि यन्त्र ले सकेंगे कर्नाटक के किसान !

कृषि में भी अब टेक्नोलोजी के प्रयोग को बढ़ावा मिल रहा है। टेक्नोलोजी के प्रयोग से अन्नदाता के लिए आसानी से सुविधाएँ मुहैया कराने से पैदावार तो बढ़ ही रही है, साथ ही खेती की तरफ युवा पीढ़ी के जुडाव की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। ऐसे ही एक प्रयोग के माध्यम से कर्नाटक सरकार राज्य के किसानों को सस्ती दर पर कृषि यन्त्र मुहैया कराने की योजना पर काम कर रही है।

किसान : मैथिलीशरण गुप्त !

बाहर निकलना मौत है, आधी अँधेरी रात है, है शीत कैसा पड़ रहा, औ’ थरथराता गात है. तो भी कृषक ईंधन जलाकर, खेत पर हैं जागते, यह लाभ कैसा है, न जिसका मोह अब भी त्यागते