सतत विकास की और बढ़ते कदम: 15 ऐसे गाँव जिन्हें देखकर आपका मन करेगा अपना शहर छोड़ यहाँ बस जाने को!

कुछ गाँव ऐसे है जो सुविधाओं में किसी शहर से कम नहीं है पर उनके मूल में वही भारतीय ग्रामीण संस्कृति बसती है। यह कुछ ऐसे गाँव है जो ना सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में पूरी तरह से आत्मनिर्भर है, साथ ही मानव जाति व प्रकृति के बीच किस तरह अद्भुत सामंजस्य बनाया जा सकता है, इसकी मिसाल पेश करते हैं।

पिता ने ठुकरायी माँग, तो पंचायत ने तोहफे में बनवाया शौचालय!

जब एक सोलह साल की सुनीथा की, घर में शौचालय बनवाने की माँग को उसके शराबी पिता ने ठुकरा दिया, तब गांव की पंचायत ने इस बच्ची के लिए एक दिन में शौचालय बनवाकर उसे तोहफे में दे दिया।

मोबाइल ऐप से अब सस्ते किराये पर कृषि यन्त्र ले सकेंगे कर्नाटक के किसान !

कृषि में भी अब टेक्नोलोजी के प्रयोग को बढ़ावा मिल रहा है। टेक्नोलोजी के प्रयोग से अन्नदाता के लिए आसानी से सुविधाएँ मुहैया कराने से पैदावार तो बढ़ ही रही है, साथ ही खेती की तरफ युवा पीढ़ी के जुडाव की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। ऐसे ही एक प्रयोग के माध्यम से कर्नाटक सरकार राज्य के किसानों को सस्ती दर पर कृषि यन्त्र मुहैया कराने की योजना पर काम कर रही है।

मल उठाने वालो को सम्मान से जीना सिखाने वाले बेज़वाड़ा विल्सन को मिला रेमन मैगसेसे पुरस्कार !

बेज़वाड़ा विल्सन को इस साल, एशिया का नोबेल कहे जाने वाले प्रतिष्टित 'रेमन मैगसेसे पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें मानव मल साफ करने वाले श्रमिकों के उद्धाऱ के प्रति अपूर्व योगदान के लिए दिया गया। बेजवाड़ा कहते हैं कि वे तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक मल उठाने वाला आखिरी व्यक्ति भी अपना काम न छोड़ दे।

कर्नाटक की लक्ष्मी, जिसने उम्र भर की जमा पूंजी गाँव के लिए कुआँ खुदवाने में खर्च कर दी!

कर्नाटक के बेहद सुदूर हिस्से में बसे एक गाँव में पेंशन के सहारे बेहद कम साधनों में अपनी जीविका चलनेवाली एक महिला ने अपनी पेंशन से मिलने वाली रकम बचाकर गाँव के लोगो के लिए एक कुआँ खुदवाया है।

सरकारी स्कूल में पढाने के लिए रोज 8 किमी पहाड़ चढ़ते है यह शिक्षक!

विपरीत परिस्थितियों में पढ़ने का जज्बा तो आपने खूब देखा होगा, लेकिन पढाने का ऐसा जज्बा कम ही देखने को मिलता है। पिछले सात साल और नौ महीनों से एक अध्यापक आठ किलोमीटर, पहाड चढ़कर बच्चों को पढाने जाते हैं। असलियत तो ये है कि उन्हीं के इस कठिन परिश्रम की वजह से यह प्राथमिक विद्यालय आज तक चल रहा है। सरकारी अकूल के इस अध्यापक की जज्बे भरी कहानी से देशभर के सरकारी अध्यापक सीख लें, तो देश के सरकारी स्कूल भी भविष्य की शिक्षित पीढियां पैदा कर सकते हैं।

कर्नाटक की पहली महिला टैक्सी ड्राईवर, ‘सेल्वी’ का यहाँ तक का सफ़र नहीं था आसान !

सेल्वी की शुरुवाती जीवन की कहानी किसी भी और घरेलु हिंसा की शिकार महिला की कहानी की तरह ही लगती है। लेकिन इसके आगे की कहानी किसी और अन्याय की कहानी से बिलकुल अलग है।

सब्जियां बेचने से लेकर मशहूर डॉक्टर बनने का सफ़र – डॉ. विजयलक्ष्मी देशमाने के संघर्ष की कहानी !

ये कहानी एक ऐसी महिला की है जिसने अपनी ज़िन्दगी में कई उतार चढ़ाव देखे है। एक झोपड़पट्टी में रहकर सब्जी बेचने से लेकर एक कैंसर विशेषज्ञ बनने तक की उनकी कहानी बिलकुल अनोखी है।

कभी शराबी रह चुके अज्जप्पा शिवलिंगप्पा आज अपने गाँव को बना रहे है नशामुक्त

अजप्पा, एक ५४ वर्षीय वृद्ध, जिसने न सिर्फ स्वयं को शराब की लत से छुटकारा दिलवाया, बल्कि अपने पुरे गाँव को एक शराब- मुक्त क्षेत्र बनाने में सफल हुआ। जानें एक प्रेरणादायक कहानी।