कभी शोषित मुमताज़, महिलाओ के अधिकार के लिए लढकर बनी ‘महाराष्ट्र की बेटी’ !

अपनी माँ को हमेशा उसने पिटते हुये देखा था और अपनी शादी के बाद भी उसे ऐसा पति मिला जिसे बिना पूछे वो घर से बाहर नही जा सकती थी। पर आज मुमताज को “महाराष्ट्र की बेटी” का खिताब देकर सम्मानित किया गया है। महिलाओ की अनेक समस्याओ का वो निवारण करने में जुटी है जिसमे घरेलु हिंसा का समावेश है। महिलाओ के लिये “राईट टू पी” (पेशाब करने का अधिकार) अभियान भी उसने शुरू किया है। मुमताज का ये सफ़र अतुलनीय है।