कचरे से संगीत पैदा करते ‘धारावी रॉक्स बैंड’ के होनहार बच्चे!

कचरा बीनने वाले बच्चो का जीवन बेहद कठोर होता है। सारा दिन गंदगी में से कचरा बीनना, उन्हें अपने ही झोपड़े में लाकर चुनना और फिर जैसे तैसे अपना पेट भरना- बस यही उनका जीवन था। इन बच्चो का बचपन, उनकी गरीबी की बिमारी की वजह से दम तोड़ चुका था। विनोद सिर्फ इनके स्वास्थ्य और बाकी अधिकारों के लिए ही नहीं बल्कि इनके नीरस और कठोर जीवन में थोड़ी सी मिठास लाने के लिए भी कुछ करना चाहते थे। इसी सोच की नींव पर शुरुआत हुई, थिरकते, गुनगुनाते और गुदगुदाते संगीत से भरे बैंड, 'धारावी रॉक्स' की!

पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ, कचरा उठाने वाले अब करेंगे सम्मानपूर्ण नौकरी !

आर्थिक विकास और शहरीकरण की देन है, हर तरफ लगा कचरे का अम्बार। पर एक एनजीओ प्रयासरत है कचरे को बेहतर तरीके से ठिकाने लगाने में हमारी मदद करने में , कचरा उठाने वालों को बेहतर जीवन प्रदान करने में और कचरे को रीसायकल (दुबारा इस्तेमाल करने लायक) कर के वातावरण को साफ रखने में।