भारत का जाबांज प्रहरी हवलदार अब्दुल हामिद जिसे मरणोपरांत मिला परम वीर चक्र!

पढ़िए हवलदार अब्दुल हामिद की कहानी जिनके अदम्य साहस और त्याग की वजह से भारतीय सेना 1965 की जंग में पकिस्तान की सेना पर हावी हो सकी।

हजारो बच्चो को मानव तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति से निकाल, एक नया जीवन दे रहे है अजीत और मंजू!

जान से मार देने की धमकियों और अपने खिलाफ कई झूठे मामले दर्ज किये जाने के बावजूद ये दंपत्ति मानव तस्करी के खिलाफ शुरू किये अपने जंग में आगे बढ़ता जा रहा है। अपनी संस्था गुडिया के ज़रिये अब तक ये हज़ारो बच्चो और महिलाओं को मानव तस्करी से बचा चुके है।

सेना के जवान की शादी का अनोखा कार्ड: हर्ष फायरिंग और शराब के शौकीन दूर रहें!

उत्तर प्रदेश के बागपत में रहने वाले जवान ने अपनी शादी के कार्ड पर आमंत्रण के साथ विशेष संदेश भी लिखा है। उनके शादी के कार्ड में लिखा है- “शादी में हर्ष फायरिंग और शराब का सेवन पूर्णतः प्रतिबंधित है। ऐसे लोगो से निवेदन है जो हर्ष फायरिंग और शराब के इच्छुक है कृपया वो शादी में शामिल न हो।

साइकिल पर महीनो भटककर आखिर इस पति ने ढूंड निकाला अपनी मानसिक रूप से बीमार पत्नी को!

40 वर्षीय तपेश्वर के पास अपनी गुमशुदा पत्नी को ढूंढने के लिए केवल एक साईकिल थी। वे अपनी पत्नी कोइसी साइकिल पर खोजते रहे, एक जगह से दूसरी जगह, जहाँ भी कोई नामो-निशान मिलता तपेश्वर वहीं पहुँच जाते।

सैकड़ों साल पुरानी कुप्रथा तोड़, किन्नरों का पिंडदान करेंगे बनारस के 151 पंडित!

किन्नरों के हित में काम करने वाली संस्था 'किन्नर अखाडा' एक ऐतिहासिक आयोजन करने जा रही है, जिसमें हाल के वर्षों में स्वर्ग सिधारे किन्नरों का पिंडदान संस्कार किया जायेगा।

इस गाँव के बच्चे स्कूल नहीं जाते थे, फिर एक दिन इन तीन लड़कियों ने सबकुछ बदल दिया!

ये कहानी उन तीन लड़कियों और उनके कभी न थकने वाले हौसले की हैं जिसने एक गाँव की शिक्षा व्यवस्था की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी। ये गाँव उत्तर प्रदेश में वाराणसी के नजदीक है। इन लड़कियों ने ताने भी सुने और अपमान भी सहा पर अपनी लड़ाई जारी रखी। उनकी कोशिशों का ही नतीजा है कि आज इस गाँव के ९०% बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाते हैं।

साउथ कोरिया के लोग हर साल अयोध्या आकर करते है अपने पूर्वजो को याद!

उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में हर साल साउथ कोरिया देश के लोग अपने देश की महाराणी हुर ह्वांग-ओके को याद करने के लिये आते है।

‘वो चार बिस्कुट’ जिनसे मुझे अनजान, बुजुर्ग अम्मा को इन्साफ दिलाने की प्रेरणा मिली !

डॉ. विभु शर्मा ने जब बुज़ुर्ग और अकेली कैलाशो अम्मा के डिब्बे में सिर्फ चार बिस्कुट देखे तो उन्होंने उनकी मदद करने की ठान ली। लाख मुश्किलें आई पर डॉ. शर्मा ने कड़े संघर्ष और सोशल मीडिया की मदद से आखिर अम्मा को उनका हक़ दिला ही दिया। आईये जानते है अम्मा को हक दिलाने की, डॉ. विभु शर्मा के संघर्ष की कहानी।

दो साल पहले गुम हुआ वंश आख़िर डिजिटल इंडिया की सहायता से पहुँचा घर !!!

भारत में हर साल करीबन एक लाख बच्चे गुम हो जाते है। और अधिकतर गुमशुदा ही रह जाते है। वंश भी इन्ही में से एक बनकर रह जाता अगर वक़्त पर दृष्टी नामक संस्था ने टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर उसे अपने घर न पहुँचाया होता।

मुंशी प्रेमचंद के ऐतेहासिक घर को बचाया इस प्रोफेसर तथा उनके छात्रों ने !

सन २००५-२००६ में मुझे यूनिवर्सिटी के कुछ विद्यार्थीयो को पढ़ाने का मौका मिला। एक विषय का असर इस तरह से हुआ कि सभी विद्यार्थीयो की सोच बदल गयी और साहित्य जगत में बड़ा बदलाव हुआ।