भीख मांगकर पाला बेसहारो को! हज़ारो की माई – सिंधुताई सपकाळ !

आज़ादी के महज़ १५ महीनो बाद, देश, चाचा नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मना रहा था। इसी दिन यानी १४ नवंबर १९४८ को, पिंपरी मेघे, वर्धा गाँव के एक गरीब भैंस चराने वाले अभिमान साठे के घर एक बच्ची का जन्म हुआ। किसी को नहीं पता था कि बाल दिवस के दिन पैदा हुई ये लड़की एक दिन हज़ारो बच्चों की माई बन जायेगी।

12 किताबे प्रकाशित करने और प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपती से प्रशंसा पाने के बाद भी चाय बेचते है लक्ष्मण राव !

रास्ते पर छोटीसी दुकान लगाकर हाथ में चाय की केटली लेके चाय बेचनेवाले लक्ष्मण राव को देखनेवाले लोगो को ये पता नहीं चलता है कि चाय बेचने के अलावा भी उनकी एक अलग दुनिया है, जिसमे वे पढने और लिखने में दिलचस्पी रखते है। लक्ष्मण राव ने 25 किताबे लिखी है और उनमे से 12 प्रकाशित हो चुकी है। इसके साथ साथ वे उच्च शिक्षा की पढाई भी रहे है।