अखबार बेचने से लेकर आइआइटी तक – सुपर 30 की शिवांगी का सफ़र !

जब शिवांगी काफी छोटी थी तब अपने पिता के साथ अखबार बेचती थी। वह एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ती थी। इंटर तक की पढा़ई करने के बाद वह पिता के काम को पूरी तरह से संभाल चुकी थी। इस दौरान एक दिन उसे सुपर 30 के बारे में पता चला। वह अपने पिता के साथ आनंद कुमार से मिली और उनका सेलेक्‍शन सुपर 30 में हो गया।