कभी नक्सली रह चुकी यह महिला, आज संवार रही है अपनी ज़िन्दगी !

जिस उम्र में बच्चे खेलते कूदते और पढ़ते है उस उम्र में शुगनी (बदला हुआ नाम) को नक्सली उसके घर से उठाकर ले गए। 9 साल की उम्र से करीब 7 साल तक शुगनी ने अपनी जिंदगी नक्सलियों के साथ काटी। लेकिन परिवारवालों की सहायता और अपनी हिम्मत के बलबूते पर आज शुगनी एक सामान्य जीवन जी रही है।

स्वयं सहायता समूह से जुडी परहिया जनजाती की महिलाओं का जीवन बना खुशहाल !

सतबरवा की परहिया जनजाती की महिलाओं की जिंदगी में आ रहा है बदलाव! १० रुपये की साप्ताहिक बचत से महिलाओं के जीवन में खुशहाली लौटी है। आईए आपको ले चलते है सतबरवा के रब्दा गांव जहां इस आदिम जनजाती के करीब १५० लोग रहते है और बदहाली से खुशहाली की ओर आगे बढ़ रहे है।