किसानों की समस्या को ही बना दिया समाधान, सूखे और भारी बारिश के लिए खोजी अनोखी तकनीक

हमारे देश में खेती के लिए लम्बे समय तक बारिश न होने या अचानक बेमौसम होने वाली बारिश से फसलों की बर्बादी होती है जिसकी मार किसान को झेलनी पड़ती है। लेकिन इसका समाधान निकाला अहमदाबाद की एक सामाजिक संस्था ने अनौखी जल सरंक्षण प्रणाली खोजकर!

हर एक पेड़ को लोहे की कीलो और इश्तहारो से मुक्ति दिला रहे है अहमदाबाद के युवा!

गुजरात के अहमदाबाद शहर के कुछ युवाओं ने मिलकर' हाइली एनेरजाइस्ड यूथ फॉर हेल्पिंग इंडीयंस' (HeyHi) नामक एक संस्थाकी शुरुआत की है। यह संस्थाशहर भर के पेड़ो के संरक्षण के मुहीम में जुटा हुआ है।

नोटबंदी से बिलकुल प्रभावित नहीं है ये छोटा सा गाँव – जानिये कैसे!

पांच सौ और हज़ार रूपये के नोटों को बंद हुए एक हफ्ता गुज़र चूका है पर लोग अभी भी अपने पुराने नोट न बदले जाने से परेशान है। काले धन पर लगाम कसने की प्रधानमंत्री की इस मुहीम का लोग जमकर साथ तो दे रहे है पर कहीं न कहीं इस कदम से पनपी असुविधाओं से अब हताश भी हो चले है। पर ऐसे में एक गाँव ऐसा है जो नोटबंदी के इन दुष्परिणामो से बिलकुल अछुता है। ये गाँव है हमारे देश का पहला डिजिटल गाँव, अकोदरा!

बेटी की शादी के लिए जोड़े हुए पैसो से उसके लिए 5 लाख की राइफल खरीद, मिसाल खड़ी की इस ऑटो-चालाक ने!

जिस दिन किसी घर के आँगन में कोई नन्ही सी कली खिलती है, उसी दिन से पिता उसकी शादी के लिए धन पाई-पाई जोड़ना शुरू कर देता है। पर अहमदाबाद में एक ऑटोरिक्शा ड्राईवर पिता ने इस सोच को बदल दिया है। उन्होंने बेटी की शादी से ज़्यादा उसके सपनों को सच करना ज़रूरी समझा।

इस २२ वर्षीया छात्रा ने अकेले बचाया गुजरात के १११ बाल मजदूरों को !

अहमदाबाद की छात्रा झरना जोशी केवल २२ साल की है पर इस छोटी सी उम्र में उन्होंने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो बड़े बड़े नहीं कर पायें। झरना ने अकेले ही एक गुप्त मिशन के चलाकर १११ मासूम बाल मजदूरों को मोरबी के सिरेमिक कारखाने से बचाकर निकाला।

माँ-बेटी की ये जोड़ी बना रही है अहमदाबाद की सडको को सुन्दर भी और सुरक्षित भी !

अहमदाबाद की सडको ने दुर्घटनाओं से बचने का कलात्मक रास्ता खोज निकाला है। श्रेय जाता है यहाँ की सौम्या पांड्या ठाकुर और शकुंतला ठाकुर को। इस माँ-बेटी की जोड़ी ने बड़ी ही कुशलता से ज़ेबरा क्रासिंग को 3D में पेंट कर, एक नया रूप दिया है।

फैशन डिज़ाइनर ने सिखाया झुग्गी में रहने वाले बच्चो को रेनकोट बनाना!

जब अनुज से कहा गया कि वह झुग्गी में रहने वाले बच्चो के बीच रेनकोट बाँटे, तो उन्होंने निश्चय किया कि बांटने की बजाय वह उन बच्चो को रेनकोट बनाना सीखायेंगे। वह भी सिर्फ तीन चीजों को इस्तेमाल कर के - तर्पुलिन, बटन और रबर बैंड।