शिक्षक के बगैर विद्यालय; क्यूंकि यहाँ खुद सीखते है बच्चे !

ज़रा सोचिये एक ऐसे नवयुवक के बारे में, जिसने शहर की आराम भरी ज़िन्दगी छोड़, गाँव की और रुख करने का सोचा। क्या किया होगा उसने वहां? मिलते हैं अभिजित सिन्हा से, जिसने एक स्कूल की शुरुआत की, एक ऐसा स्कूल जिसमे टीचर की आवश्यकता ही न हो।