मिलिए एक शिक्षक से जो अपनी सिमित आय में भी देखभाल कर रहे है कई बुजुर्गों और अनाथों की!

एक छोटी से छोटी कोशिश भी दुनियां को बेहतर बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण पहल है। और हम सब मिलकर छोटी-छोटी कोशिश कर सकते हैं। आज की कहानी है ऐसी ही एक छोटी सी कोशिश की।

अनाथालयो की बच्चियों को ‘दंगल’ दिखाने के लिए पूरा सिनेमाघर बुक किया इंदौर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने!

हमारे देश में एक तपका ऐसा भी है जिन्हें न खबरे देखने की फुर्सत है और न फिल्मे देखने की सहूलियत। फिर इन लड़कियों को कुछ बनने की प्रेरणा कैसे मिलती? इसका एक सरल सा उपाय ढूंड निकाला इंदौर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर पी नरहरी ने। उन्होंने 250 ऐसी लड़कियों को 'दंगल' फिल्म दिखाई, जो काफी गरीब घर से थी।

हैदराबाद पुलिस !! गणपति का त्यौहार !! और छः अनाथालय !! जानिए कैसे जुड़े ये तीनो !

सन १८९३ में जब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने देशवासियों को एकत्रित करने के लिए गणेशोत्सव को सार्वजानिक रूप से मनाने की सोची होगी, तब उन्होंने भी इस बात की कल्पना नहीं की होगी कि इस उत्सव का सदुपयोग कुछ इस प्रकार भी किया जा सकता है।