सचिन तेंदुलकर के जीवन से जुड़ी कुछ अनकही कहानियाँ!

यहां सचिन तेंदुलकर के बारे में छह छोटी-छोटी कहानियां और उपाख्यानों की एक लिस्ट है, जो कि फिल्म में हो सकते हैं। इनमें से सचिन की किस कहानी को आप स्क्रीन पर देखने के लिए उत्साहित होंगे?

39 साल के इस युवक का आखरी सपना था कि इनके अंतिम संस्कार के पैसो से गरीबो के लिए घर बनाया जाएँ!

39 वर्षीय राज की कैंसर के कारण हाल ही में मृत्यु हो गयी। पर जाने से पहले उन्होंने खालसा ऐड इंटरनेशनल के साथ मिल कर एक मुहीम की शुरुआत की, जिसमे उन्होंने लोगो से उनके अंतिम संस्कार पर खर्च न करते हुए गरीबो की मदद के लिए पैसे दान करने की अपील की।

पियूष पाण्डेय : चाय चखने से लेकर विज्ञापन की दुनिया के बेताज बादशाह बनने तक का सफ़र!

पियूष पाण्डेय का नाम भारतीय विज्ञापन जगत में मशहूर है और इनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मकता असीमित होती है। अपने अलग तरह के विज्ञापनों के कारण, पियूष ने अनगिनत पुरस्कार जीते हैं और असीमित प्रशंसा बटोरी है।

मिलिए पत्रकार से किसान बने गिरीन्द्रनाथ झा से, जो अब अपने गाँव को नयी पहचान दे रहे है!

एक पत्रकार, एक लेखक, इन्टरनेट की दुनियां का एक जाना माना नाम आखिर क्यूँ एक किसान बन गया? ये कहानी है चनका, बिहार के लेखक किसान, गिरीन्द्रनाथ झा की।

4 सर्जरी और 500 स्टिचस के बाद भी, ये प्रेरक नेवी ऑफिसर हैं वापसी को तैयार।

मौत का सामना करा देने वाली दुर्घटनाओं से गुजरना हमेशा ही एक बुरे सपने की तरह होता है। बिनय कुमार, एक पूर्व नेवी ऑफिसर ने भी ऐसी ही एक दुर्घटना का सामना किया लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने इसी शानदार जज्बे के चलते अब वो वापसी को तैयार है।

देशप्रेम के चलते आँगनबाड़ी में काम करने वाली माँ के इस लाल ने छोड़ी TCS कि मोटी तनख्वाह वाली नौकरी, सेना में हुआ भर्ती।

बढ़िया वेतन और सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जी रहे भारत दरबार सिंह जाधव टीसीएस में सिस्टम इंजीनियर के रूप मे कार्यरत थे। पर महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के एक छोटे से गाँव में आंगनबाड़ी सहायिका के इस बेटे के भीतर कुछ और हासिल करने का जज़्बा पनप रहा था, उनका मुक़ाम था सेना मे शामिल होकर अपने देश कि सेवा करना।

एसिड अटैक फाइटर्स द्वारा चलाये जा रहे शीरोज़ हैंगआउट को मिला नारी शक्ति पुरस्कार!

छांव फाउंडेशन को शीरोज हैंगआउट के लिये राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार दिया गया। शीरोज हैंगआउट, कैफे श्रृंखला है जो एसिड अटैक फाइटर्स के द्वारा संचालित की जाती है। 15 साल की उम्र में सौतेली मां के द्वारा एसिड हमले का शिकार हुईं रूपा ने शीरोज हैंगआउट की ओर से यह पुरस्कार ग्रहण किया।

मिलिए झारखंड के एक ऐसे व्यक्ति से जिसने जुहू तट पर अब तक 50 जानें बचाई है!

बंटी राव, जुहू तट पर तैनात एक स्वयंसेवक लाइफ गार्ड है जो किसी भी आपात की स्थिति में आपकी मदद को तैयार रहता है ।

एक जांबाज जासूस का रहस्यमयी जीवन : राॅ के प्रसिध्द मुख्य-संस्थापक आर. एन. काव की याद में!

रामेश्वर नाथ काव भारत की खुफिया एजेंसी राॅ के मुख्य-संस्थापक एवं एक महान स्पायमास्टर थे। निजी जीवन में शांत और व्यक्तिगत, काव एक कुटिल रणनीतिज्ञ और मजबूत संपर्क-सूत्र बनाने में कुशल थे। उन्होने भारत को आधुनिक गुप्तचरी सिखाई, लेकिन भारतीयों के लिए अभी तक वे एक लोकप्रिय नाम नहीं है।

एक घर जो एकत्रित करता है वर्षा का जल और उत्पादित करता है सौर ऊर्जा, आर्गेनिक भोजन और बायोगैस।!

चेन्नई के किलपाक इलाके में 17 वासु स्ट्रीट पर एक पूर्ण नियोजित घर स्थित है। सौर ऊर्जा से भरपूर इस घर में अपनी बायोगैस इकाई, जल-संचयन इकाई और खुद का किचन गार्डन है। इस घर की प्रसिद्धि इन अनूठे तरीकों को विकसित करने वाले इसके मालिक के कारण है।

मिलिए एक शिक्षक से जो अपनी सिमित आय में भी देखभाल कर रहे है कई बुजुर्गों और अनाथों की!

एक छोटी से छोटी कोशिश भी दुनियां को बेहतर बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण पहल है। और हम सब मिलकर छोटी-छोटी कोशिश कर सकते हैं। आज की कहानी है ऐसी ही एक छोटी सी कोशिश की।

अपने बेटे की मृत्यु के बाद, पुणे की इस महिला ने अपने दिल और घर के दरवाजे जख्मी पशुओं के लिए खोल दिए!

पद्मिनी स्टम्प और डॉ रवींद्र कासबेकर—पुणे के रहने वाले ये दोनों पशु-प्रेमी मानवता के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इनकी पहल, "मिशन पॉसिबल" एक ट्रस्ट हैं जो बेघर जानवरों को बचाता है और उनका इलाज और देखरेख भी करता है। उनका लक्ष्य है कि विदेशी पालतुओं की बजाय इन आवारा पशुओं पर ज्यादा ध्यान दिया जायें और उन्हें एक प्यारा घर मिले।

भुला दिये गए नायक : सरस्वती राजामणि, भारत की स्वतंत्रता के लिए किशोरावस्था में बनी ब्रिटिश खेमे में जासूस।

एक महिला जिनका जीवन हमेशा खतरों व साजिशों से भरा रहा पर उन्होंने अपने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह महिला थी भारत की सबसे कम उम्र की जासूस, 16 साल की सरस्वती राजामणि, जिन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के खुफिया विभाग के लिए सूचनाएँ जुटाने का कार्य किया।

मिलिये इस किसान से जिसने चावल की 850 से भी ज्यादा किस्मों को सहेज कर म्यूज़ियम बना डाला।

मांड्या जिले के छोटे से गाँव में रहने वाले सैयद गनी खान एक संग्रहालय (म्यूज़ियम) में संरक्षक है। उन्होंने एक अनूठी पहल की और एक ऐसा म्यूज़ियम तैयार कर दिया जहां आज चावल की 850 व 115 के आसपास आम की विभिन्न किस्मों को ना सिर्फ संरक्षित किया गया है, बल्कि उनकी खेती भी की जाती है।

इस बहादुरी भरे कारनामे के लिए मिला हवलदार तेजेश को राष्ट्रपति के हाथो जीवन रक्षा पदक!

मुंबई पुलिस में कार्यरत हवलदार तेजेश सोनावने के लिए 15 फरवरी 2016 का दिन किसी भी आम दिन की तरह ही गुज़र रहा था। अचानक उन्हें पता चला कि पास ही की एक इमारत पर कोई आदमी चढ़ गया है और वहां से कूद कर अपनी जान दे देने की धमकी दे रहा है।