विदेशी लेखकों, एक्टरों और राजनयिकों को आसान और मजेदार तरीकों से हिंदी सिखा रहीं पल्लवी सिंह

भाषा मानवीयता का पुल है, हमें जोड़ती है। वैश्वीकरण के इस दौर में हम दुनियां भर में आवास-प्रवास करते रहते हैं, हमारे देश में भी लाखों विदेशी आते हैं और उनकी मुहब्बत कहिए या कौतुहल कि उनमें से अधिकतर यहीं बस जाते हैं। ऐसे लोग हमेशा भाषा का अवरोध झेलते हुए देश में रहने के बाद भी अलग-थलग से नज़र आते हैं। इन्हें हमसे जोड़ने के लिए संवाद अनिवार्य है और संवाद के लिए समान भाषा जरूरी होती है।

आपके पसंदीदा कलाकार पढ़ रहे है आपकी पसंदीदा हिंदी कवितायें ‘हिंदी कविता’ नामक युट्यूब चैनल पर!

मनीष गुप्ता की हिन्दी कविताओं के प्रति ऐसी दीवानगी है कि उन्होने हिन्दी कविता को ही अपना काम बना लिया और लोगों तक यह संदेश पहुचाँने के लिए प्रयासरत है कि हिन्दी कविता कितनी शानदार होती है।

हिन्दी दिवस पर जानिये इस दिन से जुड़े कुछ तथ्य, तत्व और मुख्य आयोजन!

हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में 14 सितम्बर 1949 को स्वीकार किया गया। इसकी स्मृति को ताजा रखने के लिये 14 सितम्बर का दिन प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

अब स्थानीय भाषाओं में भी बन सकेगा ईमेल एड्रेस; हिन्दी से होगी शुरुआत।

भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक और आईटी मंत्रालय द्वारा ईमेल एड्रेस को स्थानीय भाषाओं में बना पाने (जिसकी शुरूआत हिन्दी से होगी) के सन्दर्भ में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनियों में शुमार माइक्रोसॅाफ्ट , गूगल, रैडिफ के सदस्यों ने मिलकर इस सम्बन्ध में सकारात्मक निर्णय लिया।

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