जन्मतिथि विशेष : मिर्ज़ा ग़ालिब की कुछ-सुनी अनसुनी शायरी और उनके पीछे का दर्द!

मिर्ज़ा ग़ालिब के उल्लेख के बगैर उर्दू शायरी की दुनियां अधूरी है। पर शायरी की दुनियां को आबाद करने वाले इस शानदार शायर की ज़्यादातर नज्मे दर्द से भरी हुई है। और ये दर्द उन्हें और कही से नहीं बल्कि अपने ही जीवन से मिला।

‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’!

9 सितंबर 1950 को पंजाब के जलंधर जिले के गाँव तलवंडी सलेम में सेवानिवृत्त मेजर सोहन सिंह संधू के घर एक बालक का जन्म हुआ। नाम रखा गया - अवतार सिंह। किशोरावस्था में पहुँचने तक अवतार सिंह ने सामाजिक तथा राजनितिक कार्यो में रूचि लेनी शुरू कर दी थी। इन्होने अपनी कलम के ज़रिये पुरे पंजाब में क्रांति फैला दी। और आगे चलकर अवतार सिंह संधू क्रांतिकारी पंजाबी कवी 'पाश' के नाम से मशहूर हो गए।

यशपाल की कहानी : ‘अखबार में नाम’!

बचपन से ही गुरदास को अपना नाम अखबार में छपवाने की बड़ी इच्छा थी। किसी भी बहाने गुरदास अपना नाम अखबार में छपवाना चाहता था। उसकी ये इच्छा कैसे पूरी हुई, पढ़िए यशपाल की लिखी कहानी- 'अखबार में नाम' में!

हरिवंशराय बच्चन के जन्मतिथि पर पढ़िए उनकी जीवनी के चारो अध्याय के कुछ अंश!

हरिवंशराय बच्चन का नाम सुनते ही याद आती है मधुशाला और उसके मधमय करती कवितायें। पर अपनी इस कालजयी कृति के अलावा भी बच्चन की कई ऐसी रचनाएं है जो समय को लोहा देकर हर काल में नयी लगती है। और ऐसी ही है उनकी लिखी आत्मकथा जो चार खंडो में विस्तृत की गयी है।

आर के नारायण के जन्मदिन पर पढ़िए उनकी अमर रचना ‘मालगुड़ी डेज’ हिंदी में!

इस महान लेखक की कहानियाँ अंग्रेजी में होने के कारण कही हिंदी पाठको को इससे वंचित न होना पड़े इसलिए श्री. महेंद्र कुलश्रेष्ठ ने इन्हें हिंदी में भी अनुवादित किया।

पुस्तक समीक्षा – स्त्री की स्वतंत्रता की नई आवाज है अनुराधा बेनीवाल की ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’!

हरियाणा की एक लड़की यूरोप गयी थी। वह पढने नहीं गयी, नौकरी करने भी नहीं गयी, न ही वह पर्यटक बन के गयी थी। वह आज़ादी की साँस महसूस करने गयी थी। एक साँस जिसका समय, स्थान, कारण, सब कुछ उसने तय किया था। उस लड़की का नाम है- अनुराधा बेनीवाल। राजकमल प्रकाशन ने अनुराधा की घुमक्कड़ी के संस्मरणों को एक किताब का रूप दे दिया है – 'आज़ादी मेरा ब्रांड'।

आपके पसंदीदा कलाकार पढ़ रहे है आपकी पसंदीदा हिंदी कवितायें ‘हिंदी कविता’ नामक युट्यूब चैनल पर!

मनीष गुप्ता की हिन्दी कविताओं के प्रति ऐसी दीवानगी है कि उन्होने हिन्दी कविता को ही अपना काम बना लिया और लोगों तक यह संदेश पहुचाँने के लिए प्रयासरत है कि हिन्दी कविता कितनी शानदार होती है।

रामधारी सिंह दिनकर की कविता – ‘समर शेष है’ !

आज रामधारी सिंह दिनकर के जन्मदिन पर हम आपके लिए उनकी एक ऐसी कविता लाये है जो उन्होंने आजादी के ठीक सात वर्ष बाद लिखी थी। आज़ादी को 69 साल बीत गए। पर दिनकर की ये कविता मानो आज ही की लिखी हुई तस्वीर ज्ञात होती है। कविता का नाम है - 'समर शेष है'।

पुस्तक समीक्षा : केदारनाथ सिंह की कविता संग्रह ‘अकाल में सारस’!

‘अकाल में सारस’ ऐसी ही कविताओं का संग्रह है, जिसमे 1983-87 के मध्य रची गयी कवितायेँ संकलित हैं। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत यह संकलन कविता को भाषा और भाव दोनों ही स्तर पर ‘भारत’ की जमीन पर खड़ा करता है। ये कविताएँ पाठक के साथ संवाद करती हैं और कविता और मनुष्य के बीच के शाश्वत सम्बन्ध को व्यक्त करती हैं।

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय – कबीर दास !

आप भले ही हिंदी साहित्य या हिंदी के लेखको और कवियों से परिचित हो न हो पर संत कबीर का लिखा, 'गुरु' को समर्पित एक दोहा आप सभी ने ज़रूर पढ़ा या सूना होगा। प्रस्तुत है गुरु के लिए लिखे संत कबीर के दोहे और उनकी व्याख्या।

“मैं तुझे फिर मिलूंगी…” – अमृता प्रीतम !

6 बरस की उम्र में सगाई, 11 बरस में मां का निधन, 16 बरस की उम्र में पहली किताब और सोलह बरस की उम्र में ही प्रीतम सिंह से विवाह। आजीवन साहिर से उत्‍कट प्रेम और जीवन के अंतिम पलों तक लगभग 50 बरस तक इमरोज का साथ। बस इतनी सी थी 31 अगस्त 1919 को पंजाब के गूंजरांवाला में जन्मी अमृता प्रीतम की कहानी। पर इतनी सी कहानी में वे अपनी खुद की इतनी सारी कहानियाँ छोड़ गयी कि साहित्य जगत उनके उल्लेख के बगैर अपूर्ण सा लगने लगा।

बेटियों को समर्पित प्रसून जोशी की नयी कविता, जो आपसे पूछ रही है, “शर्म आ रही है ना?”

बरसो तक लड़-लड़ के एक-एक करके हमारी बेटियों ने सभी क्षेत्रो में अपना परचम फैराया है, फिर चाहे वो कला हो, राजनीति हो या खेल। हाल ही में हुए रिओ ओलिंपिक में देश का नाम रौशन करने वाली साक्षी मलिक, पी.वी. सिन्धु और दीपा करमाकर जैसी खिलाड़ी इस बात की जिंदा मिसाल है। इन्ही को और इनके ही जैसी देश की हर बेटी को समर्पित है प्रसून जोशी की नयी कविता, जिसे पढ़कर आप अपने आप से, अपने समाज से एक बार ज़रूर पूछेंगे,"शर्म आ रही है ना ?"

गुलज़ार की नज्मे और नज्मों के गुलज़ार!

आज गुलज़ार साहब का 82वां जन्मदिन है। जन्मदिन के बहाने आकाश की तस्वीर को एक छोटे से कैनवस पर उतारने की ये एक छोटी सी कोशिश है।

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है – राम प्रसाद बिस्मिल !

बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाडी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका ये गीत क्रान्तिकारियों के लिए मन्त्र बन गयी थी। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते हँसते फांसी पर चढ़ गए थे।

हरिवंशराय बच्चन की कविता ‘जुगनू’!

हरिवंशराय बच्चन हिंदी के ओजस्वी कवि हैं। उनकी कविताएँ अँधेरे में रोशनदान बनकर उजाले की आस जगाती हैं। गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम, इलाहाबाद में जन्मे बच्चन साहब विश्वप्रसिद्ध कृति 'मधुशाला' के रचयिता हैं। सिने स्टार अमिताभ बच्चन के पिता, हरिवंश राय बच्चन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर रहे।