सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है – राम प्रसाद बिस्मिल !

बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाडी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका ये गीत क्रान्तिकारियों के लिए मन्त्र बन गयी थी। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते हँसते फांसी पर चढ़ गए थे।