एसिड अटैक फाइटर्स द्वारा चलाये जा रहे शीरोज़ हैंगआउट को मिला नारी शक्ति पुरस्कार!

छांव फाउंडेशन को शीरोज हैंगआउट के लिये राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार दिया गया। शीरोज हैंगआउट, कैफे श्रृंखला है जो एसिड अटैक फाइटर्स के द्वारा संचालित की जाती है। 15 साल की उम्र में सौतेली मां के द्वारा एसिड हमले का शिकार हुईं रूपा ने शीरोज हैंगआउट की ओर से यह पुरस्कार ग्रहण किया।

परिस्थिति के आगे घुटने न टेक, संपन्न और शिक्षित उर्वशी ने खोला छोले कुलचे का ठेला!

उर्वशी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक फेसबुक पोस्ट उनके जीवन को बदल देगा| इनकी कहानी फेसबुक पर छा गयी और जल्दी ही इनके ठेले पर पूरे गुडगाँव से लोग आने लगे|

भुला दिये गए नायक : सरस्वती राजामणि, भारत की स्वतंत्रता के लिए किशोरावस्था में बनी ब्रिटिश खेमे में जासूस।

एक महिला जिनका जीवन हमेशा खतरों व साजिशों से भरा रहा पर उन्होंने अपने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह महिला थी भारत की सबसे कम उम्र की जासूस, 16 साल की सरस्वती राजामणि, जिन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के खुफिया विभाग के लिए सूचनाएँ जुटाने का कार्य किया।

एक और महावीर और गीता – मिलिए कुश्ती में लडको को पछाड़ने वाली महिमा राठोड से!

हाल ही में रिलीज़ हुई दंगल फिल्म को देखकर हम सभी भावुक हुए, पर 16 साल की महिमा जब ये फिल्म अपने पिता के साथ देखने गयी तो उसके आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। कारण था फिल्म में दिखाए महावीर सिंह फोगाट का अपनी बेटियों के लिए किया गया संघर्ष जो की हु-ब-हु महिमा के पिता राजू राठोड की कहानी से मिलती जुलती है।

फोगाट बहनों के बाद हरियाणा की इन तीन बहनों ने सेना में भर्ती होकर खड़ी की एक नयी मिसाल!

जिस तरह महावीर सिंह फोगाट ने धकियानुसी परंपराओं को ताक पर रखकर अपनी बेटियों तथा भतीजियों को पहली बार अखाड़े में भेजा था उसी तरह झज्जर के खेड़का गुर्जर गांव के किसान प्रताप सिंह देशवाल ने भी अपनी बेटी प्रीती और दीप्ती तथा अपनी भतीजी ममता को सेना में भेजा है।

इस महिला ने व्हाट्स अप पर इनकी अश्लील अफवाह फैलाने वाले से अनाथ आश्रम में रु.25000 दान करवाया

श्रीलक्ष्मी के इस जानने वाले ने उनका फ़ोन नंबर व्हाट्स अप पर साझा करते हुए साथ में लिखा था कि 'ये उपलब्ध है' और उन्हें 'सुपर आइटम' लिखकर संबोधित किया था। इसके बाद श्रीलक्ष्मी को अनजान लोगो के कॉल आने शुरू हो गए।

मिलिए लखनऊ मेट्रो को पहली बार चलाने वाली प्राची और प्रतिभा से!

1 दिसम्बर को लखनऊ भारत का पहला ऐसा शहर बन गया जहाँ दो महिला चालको द्वारा मेट्रो रेल की शुरुआत की गयी। इस मेट्रो को चला रही थी अलाहबाद की प्रतिभा शर्मा और प्राची शर्मा।

सुबाशिनी संकरन – देश की पहली महिला आईपीएस, जिनके जिम्मे है मुख्यमंत्री की सुरक्षा!

सुबाशिनी संकरन देश की पहली महिली IPS अधिकारी हैं, जिन्हें आजाद भारत में किसी मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया है। इस वर्ष के जुलाई महीने में सुबाशिनी ने यह जिम्मेदारी संभाली।

अपनी घरेलू सहायक के साथ मिलकर सैकड़ों गरीब बच्चों को पढ़ा रही है नोयडा की मीना निझवान!

हममें से शायद ही कोई होगा जो समाज को कुछ देने की ख्वाहिश न रखता हो। हम सब सामाजिक मदद करना चाहते हैं, लेकिन अक्सर अकेले होने की वजह से या कहाँ से शुरू करें इन सवालों से जूझते रहते हैं। और अपने रोजमर्रा की ज़िन्दगी में खो जाते हैं। ये कहानी आपके इन सवालों को रास्ता दिखाएगी।

17 कीमी का सफ़र तय कर, रोज़ 10 घंटे तक करती है सरबजीत कौर सीमा से सटे अस्पताल में मरीजों की मदद !

अपने पति को खो चुकी सरबजीत अपनी दोनों बच्चियों और माँ के साथ अमृतसर से 45 कीमी दूर अटारी गाँव में रहती है। इसी गांव से 17 कीमी की दूरी पर है नौशेरा ढल्ला गाँव जहां के सरकारी अस्पताल में सरबजीत काम करती है। ये अस्पताल सीमा से महज़ 200 मीटर की दूरी पर है।

मिलिए माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए प्रख्यात कुमारटूली की पहली महिला मूर्तिकार से !

चायना 17 साल की उम्र से इस कला से जुड़ी हुई है। इस कला पर पुरुषो की अधिक सत्ता होने के बावजूद उन्होंने इस क्षेत्र में अपना एक अलग मकाम बनाया है।

बंगलुरु में शुरू हुआ एशिया का पहला फूड ट्रक, जिसमें सभी सदस्य हैं महिलाएँ।

'सेवेन्थ सिन' फूड ट्रक की खासियत ये है, कि यह एशिया का पहला ऐसा फ़ूड ट्रक है,जिसकी सभी सदस्य महिलाएँ हैं।

जानकीदेवी बजाज -आजादी की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली त्याग की प्रतिमूर्ति !

जानकी देवी बजाज संस्था (फाउंडेशन ) IMC की महिला विंग - जानकीदेवी बजाज पुरस्कार उन सभी महिला उद्यमियों द्वारा किये गए कामों को प्रोत्साहित और सम्मानित करता है जो उनके द्वारा ग्रामीण भारत में किये जा रहे हैं।

भारत की पहली महिला नाई, शांताबाई की अद्भुत कहानी!

अपने स्वर्गीय पति का व्यवसाय आगे चलाकर शांताबाई ने अपने परिवार को सहारा दिया।पुरुष-प्रधान समाज में सिर्फ पुरुषो द्वारा ही चलाये जानेवाले व्यवसाय को अपनाकर, वो भारत की पहली महिला नाई बनी।

बेटी की शादी के लिए जोड़े हुए पैसो से उसके लिए 5 लाख की राइफल खरीद, मिसाल खड़ी की इस ऑटो-चालाक ने!

जिस दिन किसी घर के आँगन में कोई नन्ही सी कली खिलती है, उसी दिन से पिता उसकी शादी के लिए धन पाई-पाई जोड़ना शुरू कर देता है। पर अहमदाबाद में एक ऑटोरिक्शा ड्राईवर पिता ने इस सोच को बदल दिया है। उन्होंने बेटी की शादी से ज़्यादा उसके सपनों को सच करना ज़रूरी समझा।