‘मुझे सामान की तरह उठाया गया’- एक दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता की आपबीती से उठी सुविधाजनक रेलवे की मांग!

विराली दिव्यांग अधिकारों की सशक्त कार्यकर्ता हैं। वे लेखिका और अभिनेत्री होने के साथ साथ 2014 की मिस व्हीलचेयर रनर-अप भी रही हैं। उन्हें भारतीय रेलवे के साथ कई बार संघर्ष करना पड़ा, जहां उन्हें दिव्यांग होने की वजह से मजबूरी में पुरुषों द्वारा उठाया गया। विराली अपने साथ घटी इन घटनाओं को बन्द करवाना चाहती हैं।

नोटबंदी से बिलकुल प्रभावित नहीं है ये छोटा सा गाँव – जानिये कैसे!

पांच सौ और हज़ार रूपये के नोटों को बंद हुए एक हफ्ता गुज़र चूका है पर लोग अभी भी अपने पुराने नोट न बदले जाने से परेशान है। काले धन पर लगाम कसने की प्रधानमंत्री की इस मुहीम का लोग जमकर साथ तो दे रहे है पर कहीं न कहीं इस कदम से पनपी असुविधाओं से अब हताश भी हो चले है। पर ऐसे में एक गाँव ऐसा है जो नोटबंदी के इन दुष्परिणामो से बिलकुल अछुता है। ये गाँव है हमारे देश का पहला डिजिटल गाँव, अकोदरा!

नोट बंदी के बाद अपनी दरियादिली से लोगो का दिल जीत रहे ये लोग!

पुराने पांच सौ और हज़ार के नोट बंद हो जाने से जहाँ आम जनता को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है वहीँ आम भारतियों के बीच संयम और सोहार्द की कहानियां भी सामने आ रही है। देश में काले धन के खिलाफ इस जंग में अपना पूरा योगदान करते ऐसे ही तीन कहानियां आज हम आपके सामने ला रहे है।

मुंबई आकर भीख मांगने और गजरे बेचने को मजबूर किसानो के बच्चो को देश का पहला सिग्नल स्कूल दिखा रहा है जीने की नई राह !

मोहन उन हज़ारो किसानो के बच्चो में से एक है जो अपना गाँव, अपना खेत और अपना घर छोड़कर रोज़गार की तलाश में मुंबई आते है। पर यहाँ भी गरीबी और भुखमरी उनका साथ नहीं छोडती। ऐसे में शिक्षा के बारे में सोचना तक उन्हें दूर की बात लगती है। पर अब देश के पहले सिग्नल स्कूल के खुल जाने से मोहन जैसे कई बच्चो को अपने भविष्य को सुधारने का मौका मिल रहा है।

आपको सुकून की चाय और मूक बधिरों को रोज़गार देता रायपुर का ‘नुक्कड़ चाय कैफ़े’!

रायपुर के नुक्कड़ चाय कैफ़े में आपका स्वागत है । यहाँ समय बिताने का मतलब सिर्फ चाय का लुत्फ़ उठाना ही नहीं है बल्कि उस से भी कुछ ज्यादा है । यहाँ पर गुजरने वाला समय आपको सांकेतिक भाषा सिखाएगा, किताबो के पन्नो में ख़ुद डूबाना सिखाएगा, कुछ कवितायें गुनगुनाना सिखाएगा, अपने जैसे दूसरे लोगों से आपको मिलवायेगा और नए लोगों के साथ दोस्ती करवाएगा !

सैकड़ों साल पुरानी कुप्रथा तोड़, किन्नरों का पिंडदान करेंगे बनारस के 151 पंडित!

किन्नरों के हित में काम करने वाली संस्था 'किन्नर अखाडा' एक ऐतिहासिक आयोजन करने जा रही है, जिसमें हाल के वर्षों में स्वर्ग सिधारे किन्नरों का पिंडदान संस्कार किया जायेगा।

बुज़ुर्गों को अकेलेपन से दूर करने के लिए नाटूभाई चला रहे हैं मैरेज ब्यूरो!

नाटूभाई का मानना है प्यार किसी भी उम्र में हो सकता है। इसलिए समाज की परवाह न करते हुए वृद्ध लोगों को शादी कर लेनी चाहिए। नाटूभाई 50 वर्ष से ज्यादा की उम्र के लोगों को जीवनसाथी ढूँढने में मदद कर रहे हैं।

लोगों की छतें रंगकर औऱ जमीन में संगमरमर तराशकर अपना घर संवार रही हैं राधा और सविता!

किसी निर्माणाधीन इमारत के बनने की कल्पना कीजिए। आपकी कल्पना में ठेकेदार से लेकर मजदूर, बढ़ई, पेन्टर, सब पुरूष ही होंगे। हकीकत भी इस कल्पना के करीब ही है। ऐसी जगहों पर महिलाएं काम करती भी हैं तो वो मजदूरी का ही काम करती हैं। इसके लिए उन्हें पैसे भी नाम मात्र के ही मिलते हैं। जबकि, अगर इन्हें मौका मिले तो अपने कौशल से न सिर्फ अपनेआप को पुरूषों से बेहतर सिद्ध कर सकती हैं, बल्कि सारे काम बिना किसी पुरूष सहयोगी के निबटा सकती हैं।

रेप पीड़िता को बहु बनाकर कानूनी लड़ाई में साथ दे रहा है हरियाणा का ये किसान परिवार!

29 साल के जितेन्द्र छत्तर जिंद प्रांत के किसान हैं। समाज की धारणा को ठुकराते हुए उन्होंने एक रेप पीड़िता से शादी करने का निर्णय लिया। अब वो अपनी पत्नी की न्याय पाने की लड़ाई में भी उनका बखूबी साथ निभा रहे हैं। जितेन्द्र ने अपनी पत्नी का दाखिला एक लॉ स्कूल में करा दिया है जिससे वो अपनी लड़ाई खुद लड़ सकें।

मल उठाने वालो को सम्मान से जीना सिखाने वाले बेज़वाड़ा विल्सन को मिला रेमन मैगसेसे पुरस्कार !

बेज़वाड़ा विल्सन को इस साल, एशिया का नोबेल कहे जाने वाले प्रतिष्टित 'रेमन मैगसेसे पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें मानव मल साफ करने वाले श्रमिकों के उद्धाऱ के प्रति अपूर्व योगदान के लिए दिया गया। बेजवाड़ा कहते हैं कि वे तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक मल उठाने वाला आखिरी व्यक्ति भी अपना काम न छोड़ दे।

भारत की सबसे छोटी ट्रांसजेंडर ने स्कूल की स्टेज पर सबको बताई अपनी लैंगिक पहचान !

17 साल की नैना दिल्ली के बसंत वैली स्कूल की छात्रा है। 2015 में अपने स्कूल में उसने स्टेज पर जाकर सभी के सामने अपने ट्रांसजेंडर होने की घोषणा कर दी। नैना की ये बेबाकी और आत्मविश्वास दूसरों के लिए प्रेरणा है। नैना भारत में सार्वजनिक रूप से अपनी लैंगिक पहचान बताने वाली सबसे छोटी ट्रांसजेंडर हैं। उनके साथ उनकी माँ और उनके दोस्तों का पूरा सहयोग है।

‘तितलियां’ – युवाओं की एक पहल जो झुग्गी के बच्चों की बेरंग ज़िन्दगी में रंग भर रही है!

बच्चे, बचपन और उनके चेहरे की मुस्कान को बचाने के लिए रांची में युवाओं की एक टोली आगे आई है। तितलियां नाम की संस्था रांची के युवा बिजनसमैन अतुल गेरा ने स्थापित की है। इस संस्था से रांची के कई युवा जुड़े है जो गरीब बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए लगातार काम कर रहे है। मिलिए इन युवाओं की टोली से जो अपने जज्बे से रांची के झुग्गियों में रहने वाली बच्चियों की बेरंग जिंदगी में अपने जज्बे से रंग भर रहे है।

येरवडा जेल के किशोर अपराधियों को जीना सिखा रही हैं 21 वर्षीय नीतिका !

पुणे में एक छात्रों का समूह येरवडा जेल के किशोर अपराधियों के सुधार और कल्याण के लिए काम कर रहा है। इन बच्चों की काउंसलिंग से लेकर आत्मविशवास बढाने की गतिविधियों से इन्हें बाहरी दुनियां का सामना करने की ताक़त मिल रही है।

एक कदम समानता की ओर! अब केरल में ट्रांसजेंडर्स को भी मिलेगी पेंशन!

केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार ने शुक्रवार को अपने बजट में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के ट्रांसजेंडर्स के लिए पेंशन की घेषणा की है।