पियूष पाण्डेय : चाय चखने से लेकर विज्ञापन की दुनिया के बेताज बादशाह बनने तक का सफ़र!

पियूष पाण्डेय का नाम भारतीय विज्ञापन जगत में मशहूर है और इनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मकता असीमित होती है। अपने अलग तरह के विज्ञापनों के कारण, पियूष ने अनगिनत पुरस्कार जीते हैं और असीमित प्रशंसा बटोरी है।

4 सर्जरी और 500 स्टिचस के बाद भी, ये प्रेरक नेवी ऑफिसर हैं वापसी को तैयार।

मौत का सामना करा देने वाली दुर्घटनाओं से गुजरना हमेशा ही एक बुरे सपने की तरह होता है। बिनय कुमार, एक पूर्व नेवी ऑफिसर ने भी ऐसी ही एक दुर्घटना का सामना किया लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने इसी शानदार जज्बे के चलते अब वो वापसी को तैयार है।

परिस्थिति के आगे घुटने न टेक, संपन्न और शिक्षित उर्वशी ने खोला छोले कुलचे का ठेला!

उर्वशी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक फेसबुक पोस्ट उनके जीवन को बदल देगा| इनकी कहानी फेसबुक पर छा गयी और जल्दी ही इनके ठेले पर पूरे गुडगाँव से लोग आने लगे|

पुरे गाँव की मदद से एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने आइआइटी में पढाई की और आज है गूगल में इंजिनियर!

जब एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे को भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश का अवसर मिला तो कैसे पूरे कस्बे ने आगे आकार उनकी मदद की; और आज वह गूगल के सिएटल  स्थित कार्यालय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।

सिक्यूरिटी गार्ड पिता की सीमित आय में बिना कोचिंग के ही संदीप बने चार्टर्ड अकाउंटेंट!

गरीबी की खाईयों से निकलकर अपनी मेहनत और लगन से उच्च शिक्षा की उंचाईयों तक पहुँचने वाले लोग हमेशा सबको प्रेरित करते है। ऐसे ही एक शख्स है संदीप अकड़े जिन्होंने पहली ही बार में (चार्टर्ड अकाउंटेंट) सीए की परीक्षा पास कर ली है।

स्वामी विवेकानंद के 10 प्रेरणादायक विचार जो आपको जीने की नयी राह देंगे!

आज भी, जब भारत का अधिकांश युवावर्ग नौकरी करने में नहीं बल्कि अपना कोई व्यवसाय शुरू करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है तब स्वामी विवेकानंद के विचार उन्हें सही रास्ता दिखने में बहुत सहायक हो सकते है।

फोगाट बहनों के बाद हरियाणा की इन तीन बहनों ने सेना में भर्ती होकर खड़ी की एक नयी मिसाल!

जिस तरह महावीर सिंह फोगाट ने धकियानुसी परंपराओं को ताक पर रखकर अपनी बेटियों तथा भतीजियों को पहली बार अखाड़े में भेजा था उसी तरह झज्जर के खेड़का गुर्जर गांव के किसान प्रताप सिंह देशवाल ने भी अपनी बेटी प्रीती और दीप्ती तथा अपनी भतीजी ममता को सेना में भेजा है।

अनाथालयो की बच्चियों को ‘दंगल’ दिखाने के लिए पूरा सिनेमाघर बुक किया इंदौर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने!

हमारे देश में एक तपका ऐसा भी है जिन्हें न खबरे देखने की फुर्सत है और न फिल्मे देखने की सहूलियत। फिर इन लड़कियों को कुछ बनने की प्रेरणा कैसे मिलती? इसका एक सरल सा उपाय ढूंड निकाला इंदौर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर पी नरहरी ने। उन्होंने 250 ऐसी लड़कियों को 'दंगल' फिल्म दिखाई, जो काफी गरीब घर से थी।

हजारो बच्चो को मानव तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति से निकाल, एक नया जीवन दे रहे है अजीत और मंजू!

जान से मार देने की धमकियों और अपने खिलाफ कई झूठे मामले दर्ज किये जाने के बावजूद ये दंपत्ति मानव तस्करी के खिलाफ शुरू किये अपने जंग में आगे बढ़ता जा रहा है। अपनी संस्था गुडिया के ज़रिये अब तक ये हज़ारो बच्चो और महिलाओं को मानव तस्करी से बचा चुके है।

उंगलियाँ गंवाने पर भी नहीं छोडा मोची का काम; साहस और स्वाभिमान की मिसाल है दिल्ली के दिनेश दास!

दिनेश पेशे से मोची है और दिल्ली के द्वारका इलाके के एक सड़क के किनारे बैठकर पिछले बीस सालो से अपना काम करते आ रहे है। चाहे होली हो या दिवाली, चाहे ईद हो या क्रिसमस, सड़क के इसी धुल भरे किनारे पर दिनेश आपको धुप, बारिश, सर्दी या गर्मी में अपना काम करते नज़र आ जायेंगे। पर जो नज़र नहीं आएँगी वो है उनकी उँगलियाँ।

सुबाशिनी संकरन – देश की पहली महिला आईपीएस, जिनके जिम्मे है मुख्यमंत्री की सुरक्षा!

सुबाशिनी संकरन देश की पहली महिली IPS अधिकारी हैं, जिन्हें आजाद भारत में किसी मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया है। इस वर्ष के जुलाई महीने में सुबाशिनी ने यह जिम्मेदारी संभाली।

अखबार बेचने से लेकर आइआइटी तक – सुपर 30 की शिवांगी का सफ़र !

जब शिवांगी काफी छोटी थी तब अपने पिता के साथ अखबार बेचती थी। वह एक सरकारी स्‍कूल में पढ़ती थी। इंटर तक की पढा़ई करने के बाद वह पिता के काम को पूरी तरह से संभाल चुकी थी। इस दौरान एक दिन उसे सुपर 30 के बारे में पता चला। वह अपने पिता के साथ आनंद कुमार से मिली और उनका सेलेक्‍शन सुपर 30 में हो गया।

इस दिवाली पर इस 13 साल की बच्ची की बनायीं कंदीले खरीदकर, बेसहारा लोगो के जीवन में लायें रौशनी!

बम्बई की एक 13 साल की क्षिर्जा राजे, अपने हस्तशिल्प व्यापार से कमायें सारे लाभ को ज़रूरतमंदों की सहायता में ख़र्च करती है। क्षिर्जा की कहानी हाल ही में “ ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे “ के फेसबुक पेज पर साझा की गयी थी।

कचरे से संगीत पैदा करते ‘धारावी रॉक्स बैंड’ के होनहार बच्चे!

कचरा बीनने वाले बच्चो का जीवन बेहद कठोर होता है। सारा दिन गंदगी में से कचरा बीनना, उन्हें अपने ही झोपड़े में लाकर चुनना और फिर जैसे तैसे अपना पेट भरना- बस यही उनका जीवन था। इन बच्चो का बचपन, उनकी गरीबी की बिमारी की वजह से दम तोड़ चुका था। विनोद सिर्फ इनके स्वास्थ्य और बाकी अधिकारों के लिए ही नहीं बल्कि इनके नीरस और कठोर जीवन में थोड़ी सी मिठास लाने के लिए भी कुछ करना चाहते थे। इसी सोच की नींव पर शुरुआत हुई, थिरकते, गुनगुनाते और गुदगुदाते संगीत से भरे बैंड, 'धारावी रॉक्स' की!

मिलिए देश के हजारों युवाओं को फौजियों में तब्दील करने वाले कर्नल अजय कोठियाल से !

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) के प्रिसिंपल और कई गैलेंट्री अवार्ड्स के विजेता, कर्नल अजय कोठियाल पर्वतारोहन के अलावा भी देशहित में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। और ये भूमिका है देश की सीमा पर तैनात सेना और देश के भीतर हमारी रक्षा करने वाले पुलिस सेवा के लिए फौजियों को तैयार करने की।