पेशे से सीए रह चुकी देविका, पशुओं के संरक्षण के लिए बना रही है चमड़ा-मुक्त जूते!

पशुओं के प्रति प्रेमभाव रखने वाली देविका ने जब भारत में चमड़े और कैनवस जूतो के बीच की खाई को देखा तो उन्होने अपना पेशा छोड़ हमे चमड़े की जगह एक बेहतर उत्पाद उपलब्ध कराने की ठानी और अपना खुद का एक  ब्रांड स्थापित किया।

अपने बेटे की मृत्यु के बाद, पुणे की इस महिला ने अपने दिल और घर के दरवाजे जख्मी पशुओं के लिए खोल दिए!

पद्मिनी स्टम्प और डॉ रवींद्र कासबेकर—पुणे के रहने वाले ये दोनों पशु-प्रेमी मानवता के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इनकी पहल, "मिशन पॉसिबल" एक ट्रस्ट हैं जो बेघर जानवरों को बचाता है और उनका इलाज और देखरेख भी करता है। उनका लक्ष्य है कि विदेशी पालतुओं की बजाय इन आवारा पशुओं पर ज्यादा ध्यान दिया जायें और उन्हें एक प्यारा घर मिले।

आवारा पशुओं की जिंदगियाँ बचा रहा है मैजिक कॉलर !

अँधेरे से भी एक अलग जंग होती है। कई बार गलती हमारी नहीं होती बल्कि अँधेरे की गिरफ्त में आकर अनजाने में ही हम किसी की जान ले लेते हैं। अनजाने में की गयी इन गलतियों का अफ़सोस हमें ज़िंदगी भर कचोटता है। ऐसा आपके साथ भी कई बार हुआ होगा कि रात में सडक पर लेटे या अचानक से सामने आये जानवर से टक्कर में उसकी जान चली गयी हो। और गलती न होते हुए भी आपको नुकसान भुगतना पड़ा हो।

सड़क पर पड़े पशुओं के लिए एम्बुलेंस खरीद, एक अनूठी पहल कर रहा है ये चित्रकार !

अनुपम यह समझने में खुद को असमर्थ पाते हैं कि कैसे लोग उन जानवरों की भी अनदेखी कर देते हैं, जो सड़क पर पड़े कराह रहे हो।